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Lucknow Digital Library

लखनऊ डिजिटल लाइब्रेरी छात्र उत्कृष्टता के लिए डिजिटल सामग्री की उच्च गुणवत्ता की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता है।

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Featured Digital Library Content

There are various types of digital content on Lucknow Digital Library. Explore our featured content in various document categories.

The White People by Arthur Machen

SKU: PB-02020-05-0206
The White People is a horror short story by Welsh author Arthur Machen. Written in the late 1890s.

Rudyard Kipling Ki Lokpriya Kahaniyan by Rudyard Kipling

SKU: 9789383111527
दीसा हाथियों की उस रहस्यमयी भाषा में चिल्लाया, जिसके बारे में कुछ महावतों का मानना है कि वह दुनिया के जन्म के समय चीन से आई थी, जब इनसान नहीं, हाथी मालिक थे। मोती गज उस आवाज को सुनकर वहाँ पहुँच गया। हाथी चौकड़ी नहीं भरते। वे अलग-अलग रफ्तार से अपने स्थानों से चलते हैं। अगर कभी हाथी कोई एक्सप्रेस ट्रेन पकड़ना चाहे, तो वह चौकड़ी नहीं भर सकता, मगर वह ट्रेन पकड़ सकता है। इस तरह इससे पहले कि चिहुन गौर कर पाता कि मोती गज अपने ठिकाने से चल पड़ा, मोती गज बागान मालिक के दरवाजे पर था। वह खुशी से चिंघाड़ते हुए दीसा की बाँहों में आ गया। दुन्माया एक निहायत ईमानदार लड़की थी। और अंग्रेज के लिए उसके दिल में इज्जत होने के बावजूद वह अपने पति की कमजोरियों को काफी कुछ समझती थी। उसने अपने पति को प्यार से सँभाला और एक साल से भी कम समय में वह पहनावे व चाल-ढाल से अंग्रेजन-सी हो गई। सोचने में यह अजीब लगता है कि किसी पहाड़ी आदमी को जिंदगी भर पढ़ाओ-लिखाओ और वह फिर भी पहाड़ी मानुस ही रहता है; लेकिन एक पहाड़ी औरत छह महीनों में अपनी अंग्रेजी बहनों के तौर-तरीके सीख जाती है। एक बार एक कुली औरत होती थी। लेकिन वह अलग कहानी है। —इसी संग्रह से प्रसिद्ध कथाकार रुडयार्ड किपलिंग की रोचक-पठनीय-लोकप्रिय कहानियों का संकलन।

Crito by Plato

SKU: 9788184306196
Crito' is a dialogue by the ancient Greek philosopher Plato. It depicts a conversation between Socrates and his wealthy friend Crito regarding justice, injustice and the appropriate response to injustice. Socrates thinks that injustice may not be answered with injustice, and refuses Crito's offer to finance his escape from prison.

1000 Bhautik Vigyan Prashnottari by Sitaram Singh

SKU: 9788177211740
प्राचीन काल से ही मानव भौतिक जगत् में घटनेवाली प्राकृतिक घटनाओं, जैसे रात-दिन का होना, ऋतु में परिवर्तन होना, भूकंप के झटके लगना, ज्वालामुखी का विस्फोट होना, उल्कापात होना इत्यादि के कारणों को समझने का प्रयास करता रहा है। प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से ये घटनाएँ मानव-जीवन को प्रभावित करती हैं। भौतिक विज्ञान के द्वारा इनका गहन अध्ययन किया जाता है। विज्ञान विषयक एवं सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में भौतिकी के प्रश्‍न निश्चित रूप से शामिल रहते हैं। प्रस्तुत पुस्तक में भौतिक विज्ञान की प्रमुख शाखाओं से संबंधित विभिन्न अध्यायों, जैसे कि मापन, गति के नियम, कार्य, ऊर्जा और शक्‍ति, द्रवों का प्रवाह, दोलन, तरंगें, चुंबकत्व एवं चुंबकीय मापन इत्यादि के अंतर्गत वस्तुनिष्‍ठ प्रश्‍नों का संकलन किया गया है। विद्यार्थियों, प्रतियोगिताओं में शामिल हो रहे छात्र-छात्राओं एवं सामान्य वर्ग के पाठकों के लिए यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी है।

Bound to Rise by Horatio Alger

SKU: BP-2020-005-0020
"Sit up to the table, children, breakfast's ready." The speaker was a woman of middle age, not good-looking in the ordinary acceptation of the term, but nevertheless she looked good. She was dressed with extreme plainness, in a cheap calico; but though cheap, the dress was neat. The children she addressed were six in number, varying in age from twelve to four. The oldest, Harry, the hero of the present story, was a broad-shouldered, sturdy boy, with a frank, open face, resolute, though good-natured.

Rebecca Of Sunnybrook Farm by Kate Douglas Wiggin

SKU: PB-02020-05-0155
Rebecca of Sunnybrook Farm is a classic American 1903 children's novel by Kate Douglas Wiggin that tells the story of Rebecca Rowena Randall and her aunts, one stern and one kind, in the fictional village of Riverboro, Maine.

Chhatropayogi Nibandh by Prithavi Nath Pandey

SKU: 8188267589
छात्रोपयोगी निबंध समाज की वर्तमान अवस्था और हिंदी शिक्षण के व्यापक संदर्भों को दृष्‍टिगत रखते हुए भारतीय विद्यालयों तथा हिंदी शिक्षण संस्थानों ने निबंध विषय को पाठ्यक्रमों में प्रमुखता दी है। इस कारण विद्यार्थियों की कठिनाइयाँ बढ़ती जा रही हैं, जिनका समाधान प्रस्तुत करती है यह कृति छात्रोपयोगी निबंध। पुस्तक में ‘उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद्’ और ‘केंद्रीय शिक्षा परिषद्’ के पाठ्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए निबंधों का समावेश किया गया है। इसमें विगत कई दशकों से पूछे जा रहे निबंधों तथा संभावित निबंधों को स्थान दिया गया है, जिनका अध्ययन कर विद्यार्थी किसी भी विषय पर निबंध-लेखन में पारंगत हो सकता है। लेखक ने संबंधित निबंधों की विषय-वस्तु को समझते हुए इस कृति का प्रणयन किया है, ताकि छात्र इस उपयोगी पुस्तक में दिए गए सभी निबंधों का अध्ययन कर उनसे लाभ उठा सकें।

Sense and Sensibility by Jane Austen

SKU: 9788184305266
Sense and Sensibility' is a novel by Jane Austen, published in 1811. It tells the story of the Dashwood sisters, Elinor and Marianne, both of age to marry. The novel follows the young women to their new home with their widowed mother, a meagre cottage on the property of a distant relative, where they experience love, romance and heartbreak.

Character Writings of the 17th Century by Various

SKU: 9788184307049
Character Writings of the 17th Century is presented here in a high quality edition. This popular classic work by Various is in the English language, and may not include graphics or images from the original edition. If you enjoy the works of Various then we highly recommend this publication for your book collection.

Malti Joshi Ki Lokpriya Kahaniyan by Malti Joshi

SKU: 9789351868828
मालती जोशी की कहानियों के साथ उनके लाखों प्रशंसक अपनी जिंदगी का ताना-बाना बुनते हैं। एकदम सहज और घरेलू होने के बाद भी उनकी कहानियाँ बहुत बड़ा सामाजिक संदेश दे जाती हैं। ये कहानियाँ संस्कारों का भंडार हैं। मानवीय संवेदनाओं के सूक्ष्मतम स्पंदनों को भी अपने शब्दों में बाँधने की क्षमता रखनेवाली मालतीजी अपनी सहज प्रवाहमय भाषा शैली के माध्यम से कब पाठकों के मन की गहराई में उतर जाती हैं, पता ही नहीं चलता। आज मालतीजी की कहानियाँ समाज के हर वर्ग में, चाहे वो गृहिणी हो या कामकाजी महिला, बड़े पदों पर पदस्थ व्यक्ति है या अपनी सीमित आय में कठिनाई से जीवनयापन करनेवाला साधारण व्यक्ति, नवविवाहित हो या वानप्रस्थ की ओर जाते दंपति हो, गाँव-देहात में पढ़नेवाला युवा हो या महानगरों में बड़े प्रोफेशनल कॉलेज में पढ़नेवाला युवा, गरज ये कि सभी वर्गों में सभी पीढि़यों में आदर और सम्मान के साथ ग्रहण की जाती हैं। यही कारण है कि आज मालती जोशी की कहानियों को बिखरते परिवारों को फिर से एक सूत्र में पिरोने की क्षमता रखनेवाले आशा के केंद्र के रूप में देखा जाता है। अपनी इस विलक्षण रचनाधर्मिता में मालतीजी ने एक नया आयाम जोड़ा है— कथा कथन का। मराठी की एक प्रचलित विधा का हिंदी में प्रयोग सर्वथा नया और अनूठा है। मालतीजी अपनी पूरी कहानी बिना पढ़े, बिना देखे भावों का सम्मिश्रण करते हुए पाठकों को सुनाती हैं। कथा सुननेवाले कहानी से, कथ्य से तो मुग्ध होते ही हैं, मालतीजी की शैली से भी चमत्कृत हो जाते हैं।

Santosh Goyal Ki Lokpriya Kahaniya by Santosh Goyal

SKU: 9789353223564
विष्णु प्रभाकर संतोष गोयल अपनी कहानियों में परंपरागत साँचे की चिंता नहीं करती। इन कहानियों में न आदी है, न अंत। वह सहज-सरल भाषा में वातावरण निर्माण करती है। डॉ. नामवर सिंह संतोष की कहानियाँ परंपरागत कथानक की अवधारणा को तोड़कर निकली हैं। ये सच्चे अनुभवों की जीवंत व प्रभावशाली कहानियाँ हैं, जो पाठक को सोचने को विवश करती हैं। डॉ. निर्मला जैन संतोष की कहानियों की सहज पठनीयता व आभासहीनता उन्हें विशिष्ट बनाती है। प्रत्येक कहानी एक-दूसरे से भिन्न है। वस्तुतः ये कहानियाँ जीवन यात्राएँ हैं। कथ्य का वैविध्य संतोष की विशिष्ट उपलब्धि है। श्रवण कुमार संतोष की कहानियाँ अपनी तरह की विशिष्ट हैं, जिनकी बनावट बहुत महीन है; वे मन के सूक्ष्म-से-सूक्ष्म तार पकड़ती हैं। ये कहानियाँ सरल रेखीय नहीं है। जटिल से जटिलतर समस्याओं से दो चार होती हैं, फिर भी सहज व सरल होती हैं। चंद्रकांता आज दोराहे पर खड़ी तनावग्रस्त स्त्री की वेदना को व्यक्त करती ये कहानियाँ संतोष को विशिष्ट कहानीकार बनाती हैं। मानव मन के विभिन्न अध्यायों का इतना बारीक व महीन अध्ययन और चित्रण संतोष की अतिरिक्त विशेषता है।

Mahayogi Gorakhnath by Dr. Phoolchand Prasad Gupt

SKU: 9789353226183
महायोगी गुरु श्री गोरखनाथ के लोकपावन चरित्र के बहुआयामी उपदेश लोक-जीवन को अनुप्राणित करते हैं। गोरखनाथजी के जीवन-चरित और उनके लोक-संदेशों को लेकर डॉ. फूलचंद प्रसाद गुप्त की पुस्तक ‘महायोगी गोरखनाथ’ अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। पाठक इसके माध्यम से महायोगी गोरखनाथ को जान समझ सकेंगे।

Achchha Bolne Ki Kala Aur Kamyabi by Dale Carnegie

SKU: 9788177212532
प्रखर वक्ता होना, ओजस्वी वाणी का स्वामी होना, प्रभावी शैली में श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देने की क्षमता जिसमें हो, वह सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक सफल होने की संभावना रखता है। बातचीत करना भाषण की कला सीखने का सबसे पहला सिद्धांत है। शुरुआती दौर में स्वर एवं अंदाज जैसी कलाओं पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं होती है। बातचीत करना कला को सीखने का पहला सिद्धांत है; अर्थात् बोलिए, वादविवाद में हिस्सा लीजिए, अपनी प्रतिभा का स्वयं आकलन कीजिए और दर्शकों की आलोचना से सीखने की कोशिश कीजिए। सवाल है कि खुद की गलतियों को कैसे समझा जाए? इसके लिए कुछ तथ्यों को समझने की आवश्यकता है—महान् वक्ता में कौन से विशेष गुण होते हैं और उन गुणों को कैसे प्राप्त किया जा सकता है? स्वयं के व्यक्तित्व में ऐसी कौन सी कमी है, जो इन गुणों की प्राप्ति में बाधा बन सकती है? इस विषय पर महान् लेखक डेल कारनेगी की सदाबहार एवं सर्वाधिक पसंद की जानेवाली इस पुस्तक के द्वारा कोई भी सामान्य व्यक्ति दर्शकों के समक्ष बोलने के क्षेत्र में कामयाबी के शिखर तक पहुँच सकता है।

Anjora by Sanjay Sinha

SKU: 9789352664245
जब अँधेरा दूर होता है, तब अंजोरा होता है। जब आँखों को दिखना शुरू होता है, तब अंजोरा होता है।

Hanumanji Ke Jeevan Ki Kahaniyan by Mukti Nath Singh

SKU: 9789388984003
हनुमानजी के जीवन की महागाथाओं को वैसे तो शब्दों में पिरोना लगभग असंभव ही है, क्योंकि उनकी वीरता की गाथाएँ पृथ्वी से लेकर आकाश और पाताल तक—तीनों लोकों में फैली हैं। उन्होंने ‘सब संभव है’ को अपने जीवन में चरितार्थ किया। भूख लगी तो सूर्य देवता को ही फल समझ उनकी ओर छलाँग लगा दी, तब देवराज इंद्र को अपना वज्र चलाकर उन्हें रोकना पड़ा। रावण की स्वर्ण लंका को उन्होंने जलाकर राख कर दिया और तीनों लोकों को दहलानेवाला रावण भी असहाय बना बैठा रहा। पाताल लोक में जाकर उन्होंने न केवल भगवान् श्रीराम और लक्ष्मण को बचाया, वरन् वहाँ के दुष्ट राजा अहिरावण का वध भी किया। हनुमानजी भगवान् श्रीराम के परम भक्त हैं। उनकी भक्ति की शक्ति से ही वे स्वयं को शक्तिसंपन्न मानते हैं। उन्होंने यह सिद्ध करके दिखाया है कि अनन्य और समर्पित भक्ति से सबकुछ हासिल किया जा सकता है। राम-रावण युद्ध के दौरान वे एक केंद्रीय पात्र रहे और हर अवसर पर भगवान् राम के अटूट सहयोगी के रूप में सामने आए—चाहे वह लक्ष्मणजी को लगी शक्ति का विपरीत काल हो, चाहे नागपाश वाली घटना। हनुमानजी को सीता माता द्वारा अजर-अमर होने का वरदान प्राप्त है—अजर-अमर गुणनिधि सुत होऊ—वे त्रेता से लेकर द्वापर में भगवान् राम के श्रीकृष्ण अवतार में भी उनके सहयोगी बने और महाभारत संग्राम के दौरान अनेक बार उभरे। आज कलियुग में भी वे अपने भक्तों की पुकार सुनकर उनकी मदद को दौडे़ चले आते हैं। अपूर्व भक्ति, निष्ठा, समर्पण, साहस, पराक्रम और त्याग की कथाओं का ज्ञानपुंज है हनुमानजी का प्रेरक जीवन।

Birsa Kavyanjali by Vikramaditya

SKU: 9789351866725
बिरसा की जग उठी जिजीविषा, ललक उठी पढ़ने की, जो पथ अनदेखा मुंडों को, वैसा पथ गढ़ने की। और ईश की माया ऐसी उसने जुगत लगाई, जयपाल की शाला में हुई, उसकी शुरू पढ़ाई। विषम घड़ी में भी मनुष्य अपना भविष्य गढ़ता है, पता नहीं किसी भाँति विधाता, राह प्रकट करता है! बड़े सवेरे उठकर बिरसा नित जाता था शाला, बाघ, भालुओं से उसका पड़ता ही रहता पाला। चुभते थे पग में काँटे, उठते थे ढेरों छाले, माँ ने उन सबको मन के आँसू से धो डाले। पुत्र कहीं हो, माँ की ममता वहाँ पहुँच जाती है, पता नहीं किस पथ से आ वह, उसको सहलाती है। कौशल्या भी बहुत विकल थीं, गए राम जब वन को, रोती थीं वे सोच राम के, पग की चोट-चुभन को। माँ तो बस माँ ही होती है, कौशल्या, मरियम या करमी, बेटा बस बेटा होता है, बिरसा सा गरीब या राम सा धर्मी। जंगल का कोना-कोना तो अब उसका था साथी। वनवासियों के सिरमौर वीर बिरसा मुंडा का संघर्षमय प्रेरणाप्रद जीवन सबके लिए अनुकरणीय है। उन्होंने अपने ‘युग का प्रश्न’ समझा था, उस युग की पीड़ा पहचानी थी और सबसे ऊपर उसने समय की नब्ज पकड़ी थी। एक सच्चा नायक इससे ज्यादा क्या करता है! बिरसा मुंडा के जीवन पर खंडकाव्य के रूप में विनम्र काव्यांजलि है यह पुस्तक।

Sahitya, Shiksha Aur Sanskriti by Rajendra Prasad

SKU: 9788173156786
साहित्य, शिक्षा और संस्कृति—ये तीनों व्यापक विषय हैं। इनमें जाति, धर्म और देश समाहित हैं। किसी भी देश की उन्नति और उसका गौरव इन्हीं पर निर्भर करता है। साहित्य सभ्यता का द्योतक है। साहित्य की ओट में ही काल विशेष की विशेषता छिपी रहती है, जिसे समय-समय पर साहित्यकार उद्घाटित करता है। शिक्षा जीवन में व्याप्त अंधकार को दूर कर हमारे जीवन और वातावरण में सामंजस्य स्थापित करती है। वह हमें आत्मनिर्भर बनाती है। शिक्षित समाज ही उन्नति-प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता है। भारतीय संस्कृति अपने आप में अनोखी है। यहाँ पर मानसिक स्वतंत्रता सदैव अबाधित रही है। हमारी आधुनिक संस्कृति पर अनेकानेक प्रकार के वादों का प्रभाव पड़ा है। बहुत सी बातों में विभिन्नता दिखाई देती है; परंतु यह सब होते हुए भी सारे भारत में एकसूत्रता विद्यमान है। साहित्य, शिक्षा और संस्कृति में राजेंद्र बाबू द्वारा समाज के इन तीन प्रमुख अंगों के विषय में प्रकट ओजपूर्ण विचार संकलित हैं। इनके माध्यम से पाठक राजेंद्र बाबू के विराट् व्यक्तित्व के दर्शन कर सकेंगे।