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Lucknow Digital Library
Featured Digital Library Content
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Glyn Severn’s Schooldays by George Manville Fenn
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6235989715376
The other fellows, he said, might make idiots of themselves if they liked, he should stop in and read; for Dr Bewley, DD, Principal of the world-famed establishment—a grey, handsome, elderly gentleman in the truest sense of the word—had smilingly said after grace at breakfast that when he was a boy he used to take a great deal of interest in natural history, and that he presumed his pupils would feel much the same as he did, and would have no objection to setting aside their classical and mathematical studies for the morning and watching the entrance of the procession when it entered the town at twelve o’clock.
The boys, who were all standing and waiting for the Doctor to leave the dining-hall, gave a hearty cheer at this; and as the ragged volley died out, after being unduly prolonged by the younger pupils, instead of crossing to the door from the table, the Doctor continued, turning to the mathematical master:
My Father’s Dragon by Ruth Stiles Gannett
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BP-2020-005-0112
One cold rainy day when my father was a little boy, he met an old alley cat on his street. The cat was very drippy and uncomfortable so my father said, "Wouldn't you like to come home with me?"
This surprised the cat—she had never before met anyone who cared about old alley cats—but she said, "I'd be very much obliged if I could sit by a warm furnace, and perhaps have a saucer of milk."
Mata Ahilyabai by Anil Kumar ‘Salil’
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9789351863564
Ahilyabai was born in 1725. Her father was the Patil (headman) of Chaunri (Choli) village. His name was Mankoji Shinde. Ahilyabai had been sharp-witted since her childhood. She was quite interested in studies. Therefore, she quickly learnt the lessons in ethics, religion, politics, etc.
Ahilyabai was devoted to religion. She had tremendous faith in God. She loved to help the poor. She attained the greatest satisfaction by serving them.
Saptkranti Ke Samvahak Jannayak Karpuri Thakur Smriti Granth Vol-2 by Naresh Vikal, Harinandan Sah
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9789353222529
रतीय वाङ्मय में महापुरुषों के जीवन-वृत्त पर, व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केंद्रित, आधृत अभिनंदन-ग्रंथ और स्मृति-ग्रंथ समर्पित करने की एक सुदीर्घ एवं समृद्ध परंपरा रही है, ताकि भावी पीढ़ी, जन-मानस अभिनंदित, स्मारित व्यक्ति कृत्यों, कृतियों व आदर्शों से प्रेरणा ग्रहण कर सके, उनके विराट् व्यक्तित्व में अपने को सन्निहित करने के लिए हृदयंगम कर सके।
किस तरह एक व्यक्ति सार्वजनिक जीवन के प्रश्नों को, संघर्षों को कभी व्यक्तिगत आरोहों-अवरोहों से संलिप्त, संपृक्त नहीं कर पाया। सामाजिक न्याय और समाजवाद के लिए अपनी उत्सर्गता के लिए विख्यात जनप्रिय इस व्यक्ति ने पीडि़त मानवता के उद्धार के लिए, जनता की अमूर्त भावनाओं को परखकर सियासत करने के लिए और उसे मूर्त रूप देने के लिए क्या कुछ किया, उसका अनुपम प्रत्यक्ष कराना ही इस स्मृति-ग्रंथ का मुख्य उद्देश्य है।
इसी अभीष्ट की अभिपूर्ति के लिए, महात्मा गांधी के त्याग, आंबेडकर के सिद्धांत, लोहिया के सद्विचार और जे.पी. की संघर्षशीलता-धैर्यता के समवेत अंश जननायक कर्पूरी ठाकुर के समग्र पक्षों को दुर्लभ दस्तावेजों को सहेजने, समेटने, संकलित करने का सार्थक प्रयास है यह ‘जननायक कर्पूरी ठाकुर स्मृति-ग्रंथ’।
इस ग्रंथ में यह तथ्य सबों के समक्ष परोसने की चेष्टा की गई है कि इस शब्दपुरुष ने अपने संबोधन में प्रेरणा की ज्योति को किस तरह छिटकाया, बलिदानी राष्ट्रनायकों को भी किस तरह नमन किया!
यह सर्वमान्य सत्य है कि जननायक के अंतस में लोकमंगल की सुदृढ़ भावना एक स्थायी भाव के रूप में विराजमान रहती थी, उनका यह अंतर्भाव अनायास संबोधित समाज तक संक्रमित हो जाता था। जनता में उनकी अपार आस्था, श्रद्धा और अटल विश्वास को भावी इतिहास पीडि़त मानवता के पृष्ठों पर असीम ऊर्जा और कर्मठता से लिखेगी।
भारतीय राजनीति और सामाजिक सद्भाव को समर्थता प्रदान करने में इस देदीप्यमान नक्षत्र के विभिन्न आयामों का दिग्दर्शन कराना इस स्मृति-ग्रंथ का अभिप्राय है।
इस स्मृति-ग्रंथ में सहज-सरल भाषा में व्यक्त रचनाएँ सामान्य साक्षर जनों तक लोकदेव कर्पूरी ठाकुर की सर्जनात्मक क्षमता, व्यक्तित्व की विशालता को प्रभावी स्वर प्रदान करने में सर्वभावेन समर्थ होती जान पड़ती है।
Intestinal Irrigation by Alcinous B. Jamison
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9788184305324
In the year 1496 an Italian, Gatenaria, invented an appliance for taking an enema; since that time depuratory instruments have had more or less vogue in all civilized countries. of late years inventive powers have been taxed to construct more convenient and effective appliances, and now perfection has been almost reached, and the poor civilizee, whose habits are really very bad from the savage point of view, may enjoy the delicious privilege of an internal bath whenever he feels the need of it. By any other name this bath is just as purifying: call it irrigation, injection, lavement, clyster, enema—its many names and what they mean testify to the fact that it is for the disease of civil¬iza¬tion.
From the Book.
Jeevan Jeene Ke Positive Mantra by Louise L. Hay
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9789353225841
यह आपकी निजी रचनात्मक चिंतन-प्रक्रिया में चिनगारी उत्पन्न करनेवाले विचारों की पुस्तक है। यह आपको अनुभवों एवं उनकी प्रक्रियाओं से भिन्न रूप से परिचित होने का अवसर प्रदान करेगी।
इस पुस्तक को पढ़ने के बाद आपको ऐसे विवरण प्राप्त हो सकते हैं, जिनसे संभवतः आप सहमत न हों। वे आपकी निजी विश्वास प्रणाली से टकरा सकते हैं। यह सही भी है। लेखिका इसे ‘पात्र मंथन’ कहती हैं। उनकी कही गई प्रत्येक विषयवस्तु से आपका सहमत होना आवश्यक नहीं, परंतु आप यह अवश्य परख लें कि आप किसी चीज पर क्यों विश्वास करना चाहते हैं। इसी प्रकार आपका विकास होगा और आप बदलेंगे।
इस पुस्तक को आप कहीं से भी पढ़ना प्रारंभ कर सकते हैं। इसे आप अपनी इच्छानुसार खोलें। आपको इसमें निहित पूरा संदेश तत्काल मिल जाएगा। यह आपके पूर्व विश्वासों की पुष्टि करेगी या आपको चुनौती देगी। यह सबकुछ विकास-प्रक्रिया का अंग है। जान लीजिए कि आप सुरक्षित हैं और सबकुछ ठीक है।
अपने भीतर झाँककर गुण-दोषों का अंतरावलोकन करके जीवन जीने के पॉजिटिव मंत्र बतानेवाली पठनीय कृति।
Zen Buddhism and Its Relation to Art by Arthur Waley
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9788184305271
Chapters include: Zen Buddhism; Buddhist Sects; Buddhapriya; Later Development of Zen; The Zen Masters; Fashionable Zen; Obaku; Baso; Rinzai; Zen and Art; and, The Rokutsuji School.Books on the Far East often mention a sect of Buddhism called Zen. They say that it was a "school of abstract meditation" and that it exercised a profound influence upon art and literature; but they tell us very little about what Zen actually was, about its relation to ordinary Buddhism, its history, or the exact nature of its influence upon the arts.
The Castle of Otranto by Horace Walpole
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9788184305629
The Castle of Otranto' is a gothic novel by Horace Walpole. It was first published in the year 1764. It is generally regarded as the first gothic novel, initiating a literary genre which would become extremely popular in the later 18th and early 19th century, with authors such as Charles Maturin, Ann Radcliffe, Bram Stoker, Edgar Allan Poe and Daphne du Maurier.
Florence Nightingale, The Angel of the Crimea by Laura E. Richards
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BP-2020-005-0025
One evening, some time after the great Crimean War of 1854-55, a company of military and naval officers met at dinner in London. They were talking over the war, as soldiers and sailors love to do, and somebody said: "Who, of all the workers in the Crimea, will be longest remembered?"
Each guest was asked to give his opinion on this point, and each one wrote a name on a slip of paper. There were many slips, but when they came to be examined there was only one name, for every single man had written "Florence Nightingale."
Raja Ravi Varma by Ranjit Desai
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9789390366019
यह एक ऐसे बालक की कहानी है, जो लकड़ी के कोयले से ताजा पुताई वाली दीवारों पर चित्र बनाते हुए बड़ा हुआ और जिसने आगे चलकर अपने कलात्मक कौशल के दम पर ‘राजा’ की पदवी प्राप्त की। अपनी पत्नी के घर में काम करनेवाली एक नायर महिला का चित्र बनाने पर उन्हें जितने क्रोध का सामना करना पड़ा, उतना ही सम्मान भी मिला। अनेक आलोचकों और प्रशंसकों का ध्यान महाराष्ट्र की महिला सुगंधा के साथ उनके गहरे संबंध की ओर आकृष्ट हुआ, जो उनके सर्वाधिक प्रसिद्ध चित्रों की मेनका, दमयंती और उर्वशी बनी।
रवि वर्मा भारत के सबसे प्रसिद्ध चित्रकार थे। वे जितने विवादित थे, उतने ही प्रतिभावान। उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं को मंदिर से बाहर लाकर सामान्य लोगों के घरों तक पहुँचाया और अपने ब्रश के स्पर्श से इतिहास की अनेक हस्तियों एवं पलों को अमर कर दिया। यूरोपीय कला से पूरी तरह प्रभावित वर्मा को अनेक अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में यश मिला और देश की कई रियासतों ने उन्हें सम्मानित किया। ऐसा कहा जाता है कि स्वामी विवेकानंद ने उनसे अपना छायाचित्र बनवाया था।
सांस्कृतिक इतिहास से समृद्ध और ब्रिटिश राज की पृष्ठभूमि में लिखा गया प्रसिद्ध मराठी लेखक राजा रवि वर्मा के जीवन पर केंद्रित रणजीत देसाई का यह उपन्यास हमें भारत के पहले और महान् कलेंडर आर्टिस्ट के जीवन से जुड़ी कई नई बातों को जानने और उनके मन को समझने का अवसर देता है।
Shishtachar by Mahesh Sharma
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9789383110520
शिष्ट + आचार = शिष्टाचार— अर्थात् विनम्रतापूर्ण एवं शालीनतापूर्ण आचरण । शिष्टाचार वह आभूषण है जो मनुष्य को आदर व सम्मान दिलाता है । शिष्टाचार ही मनुष्य को मनुष्य बनाता है, अन्यथा अशिष्ट मनुष्य तो पशु की श्रेणी में गिना जाता है ।
शिष्टाचार का हमारे जीवन में अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है । कहने को तो शिष्टाचार की बातें छोटी-छोटी होती हैं, लेकिन बहुत महत्वपूर्ण होती हैं । व्यक्ति अपने शिष्ट आचरण से सबका स्नेह और आदर पाता है । मानव होने के नाते प्रत्येक व्यक्ति को शिष्टाचार का आभूषण अवश्य धारण करना चाहिए ।
विद्वान् लेखक ने इस पुस्तक में शिष्टाचार के विविध पहलुओं पर गहराई से प्रकाश डाला है । इसमें घर में शिष्टाचार, मित्रों से शिष्टाचार, आस-पड़ोस में शिष्टाचार, उत्सव-समारोह में शिष्टाचार, खान-पान एवं मेजबानी के समय शिष्टाचार, बातचीत तथा पत्र-लेखन में शिष्टाचार आदि अनेक शीर्षकों के माध्यम से विषय को स्पष्टता के साथ समझाया गया है ।
आशा है, पाठकगण इस उपयोगी और प्रेरक पुस्तक का अध्ययन कर शिष्टाचार की आवश्यकता को समझकर, उसका अनुकरण व अनुसरण कर अपने जीवन को सुखमय एवं व्यक्तित्व को सफल-सार्थक बना सकेंगे ।
Mere Business Mantra by Nr Narayana Murthy
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9789386231352
संसार में यदाकदा ऐसे बुद्धिमान व धैर्यवान् व्यक्ति का उदय होता है, जिसे नजरअंदाज करना कठिन ही नहीं, नामुमकिन होता है। श्री एन.आर. नारायण मूर्ति ऐसे ही विनम्र व्यक्ति हैं। वे एक उद्यमी, उद्यमी-नेता, समाजसेवी व परिवार-प्रिय व्यक्ति हैं। अपार सफलता पाने के बाद भी उनके पाँव जमीन पर टिके हैं। शुरुआत से ही अपने मन-मुताबिक कार्य करके वे आज इस ऊँचाई तक पहुँच सके हैं। अपने कार्यों के लिए असंख्य पुरस्कार व सराहना प्राप्त करने के बाद अब समय आ गया है कि हम उनके मूल्यवान विचारों का लाभ उठाएँ।
इस पुस्तक से आपको ऐसा दृष्टिकोण, प्रोत्साहन व महत्त्वपूर्ण प्रेरणा प्राप्त होगी, जिसके बल पर आप सफलता के पथ पर आगे बढ़ते जाएँगे। पुस्तक के प्रत्येक पृष्ठ पर आपको नारायण मूर्तिजी के सीखे सबक और वर्षों के अनुभव का खजाना प्राप्त होगा। बुद्धिमत्ता से भरी इन सभी उक्तियों में प्रकट हुआ मूर्ति के जीवन का सार हर स्वप्नदर्शी एवं महत्त्वाकांक्षी व्यक्ति के लिए पथ-प्रदर्शक सिद्ध होगा।
इसलिए अपनी असफलताओं के साँचे को तोडि़ए और इस पुस्तक को पढ़कर अपने जीवन को सफल, सुखद और उज्ज्वल बनाने के मार्ग पर आगे बढि़ए।
Loktantra Ki Kasauti by Anant Vijay
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9789351865599
लेखक अनंत विजय का कहना है कि बिहार के कस्बाई शहर जमालपुर में स्कूल के दिनों से ही मुझे राजनीति में गहरी रुचि हो गई थी। पता नहीं कैसे और क्यों? राजन इकबाल सीरीज के उपन्यास पढ़ते-पढ़ते मैं कब ‘माया’, ‘रविवार’, ‘दिनमान’ के पन्ने पलटने लग गया, अब ठीक से याद नहीं। मुझे राजनीतिक रिपोर्ट्स और लेख पढ़ना अच्छा लगता था। जमालपुर के रेलवे स्टेशन पर पत्र-पत्रिकाओं की दुकान थी, उसका जो भी मालिक होता था, वह मेरा दोस्त हो जाता था। इससे फायदा यह होता था कि जो पत्रिकाएँ मैं खरीद नहीं पाता था, उसको वहीं खडे़ होकर पढ़ लेता था। बाद में जब ‘टीएनबी कॉलेज’, भागलपुर पहुँचा और हॉस्टल में रहने लगा तो छात्र राजनीति को नजदीक से देखने का मौका मिला। मैंने राजनीति तो कभी की नहीं, लेकिन राजनीतिक विषयों पर पढ़ना अच्छा लगता था। वैसे तो मैं इतिहास का विद्यार्थी था, लेकिन राजनीति की किताबें मुझे सदैव अपनी ओर खींचती रहीं।
बाद में जब मैं दिल्ली आया तो लेखन का आकाश खुला। अखबारों में टिप्पणियाँ लिखने लगा, फिर यह सिलसिला चल निकला। साहित्य में गहरी रुचि होने के कारण पहले तो मैंने जमकर साहित्यिक पत्रकारिता की, बाद में राजनीतिक लेखन की ओर मुड़ा। पिछले एक दशक में भारत की राजनीति में कई बदलाव आए, जिसको रेखांकित करना मुझे आवश्यक लगा और मैंने किया भी। प्रस्तुत पुस्तक में उन्हीं सब का लेखा-जोखा है, जो पाठकों को रुचिकर लगेगा।
Dr. Shyama Prasad Mukerjee Aur Kashmir Samasya by Ritu Kohli
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9789351865568
डॉ श्यामाप्रसाद मुकर्जी ने अपना सार्वजनिक जीवन शिक्षाविद् के रूप में आरंभ किया। कलकत्ता विश्वविद्यालय के वे उपकुलपति रहे। तदुपरांत उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया। बंगाल की प्रांतीय राजनीति में मुस्लिम लीग की सांप्रदायिकता से टक्कर ली, हिंदू महासभा के नेता के रूप में हिंदुओं के न्यायोचित हितों और अधिकारों का समर्थन किया और कांग्रेस की तुष्टीकरण की नीति का विरोध किया, राष्ट्रीय स्वातंत्र्य आंदोलन में भाग लेकर भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया, देश का विभाजन होने की अपरिहार्य स्थिति उत्पन्न हो जाने पर बंगाल का विभाजन करवाया और बंगाल के बड़े हिस्से को पाकिस्तान में जाने से बचा लिया। आजादी के बाद उन्होंने नेहरू मंत्रिमंडल में उद्योग मंत्री के रूप में भारत के औद्योगिक विकास की नींव रखी और पूर्वी पाकिस्तान के हिंदुओं के उत्पीड़न और निष्क्रमण के मुद्दे पर नेहरू की नीतियों से असहमत होकर केंद्रीय मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया। राजनीति में कांग्रेस के राष्ट्रीय विकल्प की आवश्यकता अनुभव कर भारतीय जनसंघ की स्थापना की। कश्मीर के प्रश्न पर डॉ. मुकर्जी ने शेख अब्दुल्ला की अलगाववादी नीतियों का विरोध किया; धारा 370 की समाप्ति तथा जम्मू-कश्मीर केभारतमेंपूर्णविलयकेलिएआंदोलनकियाऔर अपनेजीवनकाबलिदानदिया।कश्मीर काप्रश्नअभीभीअनसुलझा ही है। प्रस्तुत पुस्तक में वर्णित डॉ. मुकर्जी का कर्तृत्व इस अनसुलझे प्रश्न के समाधान की दृष्टि प्रस्तुत करता है।
Katha Puratani Drishti Adhuniki by Kusum Patoria
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8188139459
कथा पुरातनी, दृष्टि आधुनिकी
प्रस्तुत पुस्तक की कथाओं में लोककथा के तत्त्व सन्निविष्ट हैं। इनमें एक ओर समाज का निरावरण चित्र है तो दूसरी ओर अस्वाभाविकता की सीमा तक अतिरंजना है।
वेद शिष्ट जनों का साहित्य है, तो पुराण लोक-साहित्य। परंपरानुसार दीर्घकालीन सत्रों में पुरोहित पुराणों की कथाएँ सुनाकर यजमान व इतर अभ्यागतों का मनोरंजन किया करते थे।
‘कथा पुरातनी : दृष्टि आधुनिकी’ इन्हीं पुराणों की कुछ चुनी हुई कथाओं की आधुनिक संदर्भ में व्याख्या है। प्रश्न हो सकता है कि क्या ये कथाएँ आज के पाठक का मनोरंजन करने में समर्थ हैं? तो भले ही इनके प्रतीकात्मक अर्थ कुछ भी हों, पर इन कथाओं की प्रासंगिकता आधुनिक संदर्भ में और भी आवश्यक है।
यद्यपि इस संग्रह की अधिकांश कथाएँ वैदिक पुराणों से हैं, फिर भी कुछ कथाएँ बौद्ध जातकों व जैन पुराणों व जैनागमों के टीका ग्रंथों से भी ली गई हैं। इनमें नीति व सदाचार की कथाएँ मुख्य हैं। सांप्रदायिक सद्भाव को इंगित करती हुई भी अनेक कथाएँ हैं, अनेक कथाएँ सदाचार व नैतिकता का संदेश देती हैं।
कथाएँ पौराणिक हैं, उनकी व्याख्या की चेष्टा आधुनिकी है।
Jules Verne Ki Lokpriya Kahaniyan by Jules Verne
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9789386001320
एक-से-एक सुंदर सजावटवाले हैट, खूबसूरत पेड़-पौधे, तरह-तरह के पक्षियों, साँपों और पशुओं की कलात्मक आकृतियाँ, जिन्हें ब्राजील के वनों का परिवेश देकर जीवंत बनाया गया था। कितने ही तरह के केश-विन्यास और जूड़े, सुरुचिपूर्ण और भव्य। उनमें भी ऐसी बारीक कलात्मकता, जिसमें कोई भूल खोजी ही नहीं जा सकती।...और पोलैंड में भी न देखी गई प्रस्तुतियों के उदाहरण यहाँ मौजूद थे, मनभावन रिबनों के फूल और लहराते हुए फीते...सबकुछ अभूतपूर्व था।
यह सारा वृत्तांत मेरे एक दिन के यादगार भरे अनुभव की तसवीर है। शायद मैंने एक बटेर मारी थी। शायद मैंने एक तीतर भी मार गिराया था। शायद मैंने एक किसान को भी घायल किया था...ये सारे वे वाकिए हैं, जिनके साथ ‘शायद’ शब्द जुड़ा हुआ है। लेकिन निस्संदेह मैंने एक पुलिसवाले के हैट पर गोली चलाई थी। मैं बिना लाइसेंस की बंदूक के साथ पकड़ा गया था। मेरा जुर्म किसी दूसरे के नाम चढ़ा दिया गया था। इससे ज्यादा एक नए सीखनेवाले शिकारी के साथ और क्या हो सकता है?
—इसी संग्रह से
प्रसिद्ध कथाकार जूल्स वर्न की रोचक-पठनीय-लोकप्रिय कहानियों का संकलन।