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Mahabharatt Ke Patra-2 by Jagatnarayan Dwivedi

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महाभारत के पात्र—जगतनारायण द्विवेदी

महाभारत भारतीय वाङ्मय का अद्भुत ग्रंथ है, जिसमें पारिवारिक-सामाजिक संबंधों का अत्यंत हृदयग्राही चित्रण है। महाभारत के विभिन्न विषयों एवं कथाओं को आधार बनाकर साहित्य की विभिन्न विधाओं—काव्य, नाटक, उपन्यास, एकांकी आदि—में इसे अभिव्यक्ति प्रदान करने का भरसक प्रयत्न हुआ है; परंतु महाभारत के विभिन्न पात्रों की प्रामाणिक एवं सर्वांगीण विवेचना कम ही हुई है।
दो खंडों के इस ग्रंथ ‘महाभारत के पात्र’ में इसी अभाव की पूर्ति की गई है। पूर्ण रूप से मूल को आधार बनाकर शोधपरक विधि से पात्रों का चरित्रांकन किया गया है। प्रथम भाग में महाभारत के प्रमुख सात पात्रों—अर्जुन, भीम, द्रोण, भीष्म, अश्वत्थामा, कर्ण एवं अभिमन्यु का चरित्र-चित्रण है तथा दूसरे भाग में धर्मराज युधिष्ठिर, नकुल, सहदेव, सात्यकि, धृष्टद्युम्न, घटोत्कच, दुर्योधन, कृप, शल्य, धृतराष्ट्र, श्रीकृष्ण, विदुर, कृष्णद्वैपायन व्यास, द्रौपदी, कुंती, गांधारी, सुभद्रा तथा उत्तरा का चरित्र-चित्रण है।
ग्रंथ की भाषा और शैली अत्यंत सरल एवं सुबोध है, जिससे पाठकगण विषय का पूरा लाभ उठा सकें। एक ओर जहाँ यह ग्रंथ विद्वज्जनों और शोधार्थियों के लिए उपयोगी है, वहीं सामान्य जन के लिए भी तुष्टिदायक एवं ज्ञानपरक है।

Kashi Kabhi Na Chodiye by Shyamla Kant Verma

SKU: 8188267562

काशी कभी न छोड़िए
अब न तो नौटंकियों के प्रति उत्साह रह गया है, न कठपुतली नाटकों के प्रति। मनोरंजन के नए साधनों ने लोकगीत और लोक-नृत्य की समृद्ध परंपरा को आहत किया है। स्वतंत्रता पूर्व के कई प्रचलित सिक्कों से वर्तमान पीढ़ी अपरिचित हो चुकी है। नए खेलों ने पुराने खेलों का स्थान ले लिया है। धर्म और संस्कृति के प्रति भी लोग उदासीन दिखाई पड़ते हैं। न धर्मस्थलों को जानने-पहचानने में रुचि है, न कुंडों और कूपों को—और तो और, धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी काशी की जनता भी काशी के इन महत्त्वपूर्ण स्थानों से अपरिचित होती जा रही है। देश की विभिन्न समस्याओं को उजागर करने तथा काशी की महिमा का बोध कराने के उद‍्देश्य से लिखा गया उपन्यास ‘काशी कभी न छोड़िए’ एक महत्त्वपूर्ण कृति है।

ससाहित्यकार डॉ. श्यामला कांत वर्मा ने व्यक्‍तिपरक इस सामाजिक उपन्यास में काशी के गौरव को चिह्नित करने में सफलता अर्जित की है। निश्‍चय ही वाराणसी अपने आपमें एक लघु हिंदुस्तान है। काशी की गंगा-जमुनी संस्कृति अनुकरणीय है। निश्‍चय ही इसे पढ़कर पाठकगण काशी के वर्तमान सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य की रोचक व ज्ञानपरक जानकारी प्राप्‍त कर पाएँगे।

Mahabharatt Ke Patra-1 by Jagatnarayan Dwivedi

SKU: 8188266965

महाभारत के पात्र—जगतनारायण द्विवेदी

महाभारत भारतीय वाङ्मय का अद्भुत ग्रंथ है, जिसमें पारिवारिक-सामाजिक संबंधों का अत्यंत हृदयग्राही चित्रण है। महाभारत के विभिन्न विषयों एवं कथाओं को आधार बनाकर साहित्य की विभिन्न विधाओं—काव्य, नाटक, उपन्यास, एकांकी आदि—में इसे अभिव्यक्ति प्रदान करने का भरसक प्रयत्न हुआ है; परंतु महाभारत के विभिन्न पात्रों की प्रामाणिक एवं सर्वांगीण विवेचना कम ही हुई है।
दो खंडों के इस ग्रंथ ‘महाभारत के पात्र’ में इसी अभाव की पूर्ति की गई है। पूर्ण रूप से मूल को आधार बनाकर शोधपरक विधि से पात्रों का चरित्रांकन किया गया है। प्रथम भाग में महाभारत के प्रमुख सात पात्रों—अर्जुन, भीम, द्रोण, भीष्म, अश्वत्थामा, कर्ण एवं अभिमन्यु का चरित्र-चित्रण है तथा दूसरे भाग में धर्मराज युधिष्ठिर, नकुल, सहदेव, सात्यकि, धृष्टद्युम्न, घटोत्कच, दुर्योधन, कृप, शल्य, धृतराष्ट्र, श्रीकृष्ण, विदुर, कृष्णद्वैपायन व्यास, द्रौपदी, कुंती, गांधारी, सुभद्रा तथा उत्तरा का चरित्र-चित्रण है।
ग्रंथ की भाषा और शैली अत्यंत सरल एवं सुबोध है, जिससे पाठकगण विषय का पूरा लाभ उठा सकें। एक ओर जहाँ यह ग्रंथ विद्वज्जनों और शोधार्थियों के लिए उपयोगी है, वहीं सामान्य जन के लिए भी तुष्टिदायक एवं ज्ञानपरक है।

Chiktsa Aur Hum by Dr. Anil Chaturvedi

SKU: 8188139661

चिकित्सा और हम
आजकल की व्यस्तता भरी जिंदगी में मनुष्य अनेक बीमारियों से ग्रस्त है। इस भौतिकवादी युग में पुरानी मान्यताएँ टूट रही हैं, आस्थाएँ बिखर रही हैं, डॉक्टर और रोगी में पारस्परिक विश्‍वास टूट रहा है। आज का रोगी अपने रोग के बारे में पूरी जानकारी चाहता है।
पिछली शताब्दी में चिकित्सा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है, जिसके फलस्वरूप आम आदमी की औसत आयु में भी वृद्धि हुई है। एक ओर जहाँ एंटीबायोटिक ओषधियों के प्रचलन से संक्रामक रोगों पर नियंत्रण किया जा चुका है वहीं दूसरी ओर आधुनिक जीवन-शैली के रोग मधुमेह, उच्च रक्‍तचाप, हृदय रोग, मोटापा, कैंसर एवं मानसिक तनाव हमारे लिए एक गंभीर चुनौती हैं। हम अपनी परंपरागत जीवन-शैली, शारीरिक श्रम, सादा जीवन उच्च विचार, नियमित भोजन को छोड़कर पाश्‍चात्‍य सभ्यता के रंग में रँग गए हैं; धूम्रपान, शराब, मांसाहारी भोजन, भोग-विलास में लिप्‍त होने से, भोग से रोग के कारण आधुनिक जीवन-शैली के रोगों के शिकार हो गए। लेखक ने इस पुस्तक में आधुनिक जीवन-शैली के रोगों का विस्तृत वर्णन सरल भाषा में किया है। कई दीर्घकालीन रोग हैं, जिनका उपचार बहुत महँगा है, लेकिन अपने आचार-विचार एवं आहार-विहार द्वारा इन रोगों से अपना बचाव किया जा सकता है। आवश्यकता इस बात की है कि सावधानियों को जानने के साथ ही उन पर अमल भी किया जाय, तभी लेखक का उद‍्देश्य सफल हो सकेगा।

Jeevan Ek, Rang Anek by Ram Prasad Mishra

SKU: 8188140309

जीवन एक, रंग अनेक ‘ पुस्तक में महापुरुषों के जीवनों के अनेक प्रेरक और रोचक रूपों के दर्शनों से मानव की मूल एकता उजागर होती है । मानव मूलत: एक है, किंतु कोई दो मानव एकदम एक नहीं होते । प्रतिभा तथा अध्यवसाय, वंश अथवा प्रभाव इत्यादि के कारणों से कोई बहुत ऊपर उठ जाता है, कोई कुछ नहीं कर पाता । किंतु ऊपर उठा हो या नीचे दबा, मूलत: होता मानव ही है । दूसरा बिंदु है रोचकता । प्रेरणा और ज्ञानवर्द्धन के साथ अच्छा मनोरंजन भी विद्यमान है । नेताओं, वक्‍ताओं, प्राध्यापकों, छात्रों एवं सर्वसामान्य हेतु लिखी गई यह प्रेरक और रोचक पुस्तक पठनीय तो है ही, संग्रहणीय भी है । उपहारस्वरूप भेंट करने के लिए यह पुस्तक सर्वोत्तम होगी ।

Bharat Main Shiksha Ke Badhte Kadam by Madan Singh

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भारत में शिक्षा के बढ़ते कदम—डॉ. मदन सिंह
शिक्षा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को वर्तमान संदर्भ में रेखांकित करती तथा इसकी विविध स्थितियों पर विवेचना करनेवाली यह नवीनतम पुस्तक है।
इस पुस्तक में शिक्षा के परिवर्तनशील एवं प्रयोगवादी ढाँचे से संबंधित अधुनातन सैद्धांतिक पक्षों, कार्य-पद्धतियों एवं रणनीतियों का समावेश करके उनके नवीनतम स्वरूप को प्रस्तुत किया गया है।
शिक्षा की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से आयोजित एवं संचालित करने की अद्यतन जानकारी देनेवाली यह पुस्तक शासकीय और अर्धशासकीय अभिकरणों, राज्य संसाधन केंद्रों, स्वयंसेवी संगठनों, जन शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों एवं परास्नातक महाविद्यालयों के शिक्षा संकायों, समाज कार्य विभागों तथा प्रौढ़, सतत शिक्षा एवं प्रसार विभागों, उच्च शोध संस्थानों के साथ-साथ सार्वजनिक पुस्तकालयों के लिए अत्यंत उपयोगी है।

Cartoonon Mein Gandhi by Shivanand Kamade

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कार्टूनों में गांधी
महात्मा गांधी विश्‍व की महान् हस्ती थे। वे जीवन के प्रति संघर्ष करनेवाले एक अद्वितीय योद्धा थे। उनके व्यक्‍तित्व की विराटता, दृढ़ निश्‍चयात्मकता, रहस्यवादी सहजता, उत्कट संघर्षशीलता ने भारत ही नहीं बल्कि विश्‍व भर के तत्कालीन प्रख्यात व्यंग्य चित्रकारों को अपनी ओर आकृष्‍ट किया। स्वयं गांधीजी ने भी अपने व्यंग्य चित्रों में गहरी रुचि दिखाई।
प्रस्तुत पुस्तक गांधीजी पर केंद्रित व्यंग्य चित्रों का हिंदी में पहला संकलन है। इसमें भारत सहित विश्‍व के अनेक सुप्रसिद्ध एवं महान् व्यंग्य चित्रकारों के कार्टून चित्र संकलित हैं, जो भारत की तत्कालीन राजनीति, समाज-व्यवस्था एवं देश की अंतर्बाह्य परिस्थितियों को अपने अलग ही रोचक व आनंदप्रद अंदाज में प्रस्तुत करते हैं।

Bharat Ke Pavitra Teerthsthal by Narayan Bhakta

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भारत के पवित्र तीर्थ स्थल—नारायण भक्त
तीर्थ का अभिप्राय है पुण्य स्थान, अर्थात् जो अपने में पुनीत हो, अपने यहाँ आनेवालों में भी पवित्रता का संचार कर सके। तीर्थों के साथ धार्मिक पर्वों का विशेष संबंध है और उन पर्वों पर की जानेवाली तीर्थयात्रा का विशेष महत्त्व होता है। यह माना जाता है कि उन पर्वों पर तीर्थस्थल और तीर्थ-स्नान से विशेष पुण्य प्राप्त होता है, इसीलिए कुंभ, अर्धकुंभ, गंगा दशहरा तथा मकर संक्रांति आदि पर्वों को विशेष महत्त्व प्राप्त है। पुण्य संचय की कामना से इन दिनों लाखों लोग तीर्थयात्रा करते हैं और इसे अपना धार्मिक कर्तव्य मानते हैं।
पुण्य का संचय और पाप का निवारण ही तीर्थ का मुख्य उद्देश्य है, इसलिए मानव समाज में तीर्थों की कल्पना का विस्तार विशेष रूप से हुआ है। श्रीमद्भागवत में भक्तों को ही तीर्थ बताकर युधिष्ठिर विदुर से कहते हैं कि भगवान् के प्रिय भक्त स्वयं ही तीर्थ के समान होते हैं।
प्रस्तुत पुस्तक में विभिन्न धर्मों के अनुयायियों के आस्था के केंद्रों—पवित्र तीर्थस्थलों—का रोचक वर्णन है। ये न केवल आपकी आस्था और विश्वास में श्रीवृद्धि करेंगे, बल्कि आपको मानव जीवन के मर्म का सार भी बताएँगे। पढ़ते हुए आपको साक्षात् उस तीर्थ का दर्शन हो, यह इस पुस्तक की विशेषता है। यदि आपका मन निर्मल है, और हमें विश्वास है कि वह है, तो आप घर बैठे ही तीर्थ का पुण्य-लाभ प्राप्त करेंगे।

Anupam Kahaniyan by Yashwant Mande

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अनुपम कहानियाँ
अनुपम कहानियाँ संग्रह की कहानियों की विशेषता इनकी विविधता है। सारी कहानियाँ ऐसे विषयों पर हैं जिन पर आज तक कहानियाँ नहीं लिखी गई हैं। ‘सम्राट्’ कहानी शिवाजी के आगरा से भाग जाने की घटना का रोमांचक वर्णन है। ‘आतंक’ कहानी उग्रवाद को एक चामत्कारिक रूप देती है। वसिष्‍ठ श्रीरामचंद्र के गुरु थे और ‘वसिष्‍ठ’ कहानी उनके जीवन पर नया प्रकाश डालती है। ‘सह्याद्रि’ कहानी पाठकों को अपने साथ पर्यटन पर ले जाती है और फिर पाठकों को वर्तमान जीवन के संघर्ष पर विचार करने के लिए विवश कर देती है। इसी तरह सारी कहानियों में ताजगी और नयापन है।
यशवंत मांडे की शैली और प्रस्तुतीकरण आकर्षक है। भाषा का प्रयोग कहानी के विषय के अनुसार और सरल है। इन कहानियों में किसी प्रकार की अश्लीलता नहीं है और इसे बच्चे, बूढ़े और स्‍त्रियाँ सभी पढ़ सकते हैं।
ये कहानियाँ वास्तव में अनुपम हैं और हमें आशा है कि पाठकों को पसंद आएँगी।

Russia Ki Shreshtha Kahaniyan by Bhadra Sen Puri

SKU: 8185828881

विश्‍व भर के कहानी-जगत् में रूसी कहानीकारों का एक विशिष्‍ट स्थान है । गोर्की, चेखव, टॉलस्टॉय आदि तो रूस के शीर्षस्थ कथा-शिल्पी हैं । इनके अतिरिक्‍त भी वहाँ ऐसे अनेक कहानीकार हुए हैं जिनकी कहानियों ने विश्‍व भर के पाठकों के मानस पर अमिट छाप छोड़ी है ।
हालाँकि हाल के वर्षों में विदेशी साहिल। के अनुवाद के क्षेत्र में न्यूनाधिक कार्य हुए हैं, फिर भी करोड़ों हिंदीभाषी पाठक कई प्रमुख रूसी कहानीकारों की कहानियों, जो रूसी भाषा की चर्चित और प्रसिद्ध कहानियों रही हैं, के पठन-सुख से अब तक वंचित रहे हैं ।
यह पुस्तक उस अभाव को अवश्य दूर करेगी । इसमें संगृहीत कहानियों के चयन व अनुवाद में विशेष सावधानी बरती गई है । ये सभी कहानियों रूसी समाज और संस्कृति को प्रतिबिंबित तो करती ही हैं, हिंदी पाठकों को तृप्‍त भी करती हैं । प्रबुद्ध पाठक तथा शोधकता तो शायद एक ही बैठक में इस पूरी पुस्तक को पढ़ डालें ।

Katha Yatra by Ramesh Nayyar

SKU: 818826718X

छत्तीसगढ़ की संस्कृति का स्थायी भाव समन्वय और औदार्य रहा है । यहाँ के कहानीकारों की रचनाओं में ये भाव मुखर होते हैं । श्रीमती शशि तिवारी, श्री जगन्नाथ प्रसाद चौबे ‘ वनमाली ‘, श्री प्यारेलाल गुप्त, श्री केशव प्रसाद वर्मा, श्री मधुकर खेर, श्री टिकेंद्र टिकरिया और श्री पदुमलाल पुन्नालाल बख्‍‍शी सहित पुरानी पीढ़ी के साहित्यकारों की कहानियों से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विशिष्‍टता पूरी भव्यता के साथ झाँकती है । उन्हीं दिनों सर्वश्री यदुनंदन प्रसाद श्रीवास्तव, स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी, घनश्याम, विश्‍वेंद्र ठाकुर, नरेंद्र श्रीवास्तव, नारायणलाल परमार, शरद कोठारी, हनुमंत लाल बख्‍‍शी, श्याम व्यास, प्रदीप कुमार ‘ प्रदीप ‘, भारत चंद्र काबरा, प्रमोद वर्मा, चंद्रिका प्रसाद सक्सेना और देवी प्रसाद वर्मा सहित अनेक कथाकारों की कहानियाँ प्रकाश में आईं ।
सन् 1956 के बाद नई कहानी के दौर में शरद देवड़ा और शानी ने राष्‍ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई । कहानी के सचेतनवादी आदोलन में मनहर चौहान सक्रियता के साथ सामने आए । ‘ झाड़ी ‘ और कुछ अन्य कहानियों के प्रकाशन के साथ श्रीकांत वर्मा ने महत्त्वपूर्ण स्थान बनाया । श्रीमती कुंतल गोयल और श्रीमती शांति यदु की कहानियाँ भी चर्चित रहीं । इनके अलावा छत्तीसगढ़ कें दूरस्थ कस्बों में रहकर कुछ रचनाकारों ने अच्छी कहानियों लिखीं, जो राष्‍ट्रीय स्तर पर चर्चित रहीं ।
मुद्रित कहानियों के इतिहास में छत्तीसगढ की उपस्थिति कम-से-कम एक शताब्दी पुरानी है । पं. माधवराव सप्रे की कहानी ‘ एक टोकरी भर मिट्टी ‘ सन् 1901 में ‘ छत्तीसगढ मित्र ‘ में प्रकाशित हुई थी । छत्तीसगढ़ हिंदी कथा-साहित्य के सृजन का केंद्र बना रहा है । पं. लोचन प्रसाद पांडेय द्वारा छद्म नाम से कुछ कहानियाँ लिखे जाने का उल्लेख मिलता है। पं. मुकुटधर पांडेय बाबू कुलदीप है । सहाय की कहानियाँ बीसवीं सदी के दूसरे दशक में प्रकाशित हुईं । सन् 1915 में श्री प्यारेलाल गुप्‍त का भी एक कहानी संग्रह प्रकाशित हुआ । हिंदी कहानी की प्राय : सभी लहरों और आदोलनों में छत्तीसगढ़ की उपस्थिति रही है ।
इस कथा संकलन में छत्तीसगढ़ के प्रतिष्‍ठ‌ित व विख्यात कथाकारों की रचनाएँ संकलित हैं, जिन्होंने हिंदी कथा- क्षेत्र में अपनी विशिष्‍ट राष्‍ट्रीय पहचान बनाई है । इनमें से अनेक हिंदी के बहुख्यात नाम हैं, तो कुछ ऐसे भी हैं जो लिक्खाड़ न होने पर भी रचना की अपनी विशिष्‍ट मौलिकता और पहचान के कारण उल्लेखनीय हैं । अलग- अलग कथाकारों के अपने अलग रंग और अंदाज हैं । अंचल और उसके लोक लोक-संस्कृति और संघर्ष की छाप, मनुष्य और समाज के संबंधों, उसकी संवेदनाओं के अक्स, अधुनातन समाज की जटिलताओं और उसके दबावों की छाप प्राय : इनमें है ।
इन कहानियों में पाठकों को मिलेगा संवेदना का घनत्व, शिल्प का वैभिन्‍न्‍य तथा हृदय को छू जानेवाली मार्मिकता । कहानियों के रंग और लय भिन्न-भिन्न हैं, जो कथा- रस का संपूर्ण आनंद देते हैं ।

Asha Ka Savera   by Barack Obama

SKU: 9788173157288

बराक ओबामा के अमेरिका के राष्ट्रपति बनते ही पूरे विश्व में एक आशावाद का संचार हो गया। इसका कारण था समाज के हर अंग के प्रति उनका चिंतन और सोच। उनकी मान्यता है कि प्रत्येक बच्चे को अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए-और यह केवल एक हवाई वादा बनकर ही नहीं रह जाना चाहिए; सभी बच्चे कॉलेज की पढ़ाई करने में भी सक्षम होने चाहिए चाहे उनके माता-पिता धनाड्यन हों। वे सुरक्षा चाहते हैं-अपराधियों और आतंकवादियों से। वे चाहते थे स्वच्छ वायु स्वच्छ जल और अपने बच्चों के साथ कुछ समय बिताना। और जब वे बूढ़े हो जाएँ तो गरिमा व सम्मान के साथ सेवानिवृत्त हो सकें।
भूमंडलीकरण और विस्मयकारी प्रौद्योगिकीय परिवर्तनों, गलाकाट राजनीति और अनवरत सांस्कृतिक युद्धों के इस युग में सर्वसम्मति बनाकर और मिल-जुलकर काम करने से ही समस्याओं का समाधान होगा। सरकारें हर समस्या हल नहीं कर सकतीं। परंतु अपनी प्राथमिकताओं को थोड़ा सा बदलकर हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि प्रत्येक बच्चे को जीवन में आगे बढ़ने का उचित अवसर मिले, ताकि वह उन चुनौतियों का सामना कर सके, जो एक राष्ट्र के रूप में हम सभी के सामने खड़ी हैं। समाज के सभी वर्गों के बीच सामंजस्य बिठाकर अभाव और कमियों को दूर करने के लिए आशावाद का संचार करनेवाली कृति है उगशा का सवेरा।

Jug Jannani Janki by Rajendra Arun

SKU: 9788173156694

मानस के दोहों-चौपाइयों का अर्थ बताते समय धर्म-दर्शन के गूढ़ तत्त्वों और जीवन के सहज किन्तु विस्मृत सत्यों को अपनी मृदु-मधुर शैली में हमारे हृदय की गहराइयों तक उतारते जाना अरुणजी की प्रमुख विशेषता है।
सीता के पावन चरित्र को तुलसी ने बड़ी श्रद्धा और आस्था से सँवारा है। सीता के जीवन में दो कटु प्रसंग आते हैं—अग्नि-परीक्षा और निर्वासन। दोनों प्रसंगों को तुलसी ने अपनी कालजयी काव्य-प्रतिभा के बल पर निष्प्रभावी कर दिया है। उन्होंने लंकावासिनी सीता को छाया सीता बना दिया। लंका-विजय के बाद राम उन्हें पुन: पाने के लिए ‘कछुक दुर्वाद’ कहते हैं। छाया सीता अग्नि में प्रवेश करती हैं और उसमें से वास्तविक सीता निकलती हैं जो न लंका में गयी थीं, न कलंकित ही हुई थीं।
सीता के निर्वासन के प्रसंग को तुलसी ने छुआ तक नहीं है। रामराज्य के वर्णन में उन्होंने लिखा—
एक नारी ब्रत रत सब झारी।
ते मन बच क्रम पति हितकारी।।
ऐसे रामराज्य में धोबी का कलुषित प्रकरण कैसे स्थान पा सकता था!
प्रस्तुत पुस्तक में सीता के त्यागमय और प्रेरणादायी चरित्र का लुभावना अंकन किया गया है।

Rom Rom Mein Ram by Rajendra Arun

SKU: 8173150710

रोम रोम में राम
हनूमान सम नहिं बड़ भागी।
नहिं कोउ राम चरन अनुरागी।।
शिवजी कहते हैं कि हनुमान के समान न तो कोई बड़भागी है और न राम के चरणों का अनुरागी। यह कथन बड़ा गहरा है। कुछ लोग सोचते हैं कि अच्छा खा-पीकर, खूब धन कमाकर, बड़ा मकान बनवाकर आदमी भाग्यशाली हो जाता है। लेकिन क्या यही मनुष्य का चरम लक्ष्य है? क्या ऐश्वर्य उसे धन्य करने की शक्ति रखता है?
हनुमान ‘राम-काज’ करके बड़भागी बन गये थे। वास्तव में इस संसार में ‘विद्यावान्, गुणी, अतिचातुर’ लोग बड़ी मुश्किल से ‘राम-काज’ करने के लिए आतुर होते हैं। प्राय: आदमी कुछ खूबियों को पाकर अपनी तिजोरियाँ भरना चाहता है, नाम कमाना चाहता है, अपना साइनबोर्ड हर जगह लगवाना चाहता है। दूसरे के हित की कामना करने का तो उसे खयाल भी नहीं आता। इस तरह के काम उसके हिसाब से ‘मूर्ख’ करते हैं।
कीचड़ में सने चिन्तन के इस चक्के को हनुमान ने सही दिशा में मोड़ा। बेजोड़ प्रतिभा और अतुलित बल के कुबेर होते हुए भी उन्होंने स्वार्थ के लिए उसका उपयोग कभी नहीं किया। साधारण मनुष्य में यदि विद्या, गुण या चतुराई में से कोई एक थोड़ा भी आ जाए तो वह ऐंठकर चलने लगता है। पर हनुमान सर्वगुण-सम्पन्न होकर भी सेवक ही बने रहे।
आज के संसार को पहले से कहीं अधिक सेवा की, भक्ति की जरूरत है। और इसके सबसे बड़े आदर्श और प्रेरणापुरुष हैं हनुमानजी। प्रस्तुत पुस्तक ‘रोम रोम में राम’ में हनुमान के महिमामय चरित्र का गहन, ललित और मोहक अंकन हुआ है।

Bharatiya Parmanu Shastra by Jasjit Singh

SKU: 8173152896

तीन दशकों तक भारत परमाणु शक्‍त‌ि के रूप में उभरने की दिशा में आत्मसंयम बरतने की नीति अपनाता आ रहा था । 11 – 13 मई, 1998 को भारत की रक्षानीति में नया मोड़ आया । इस दिन भारत ने परमाणु परीक्षण किए । यह राष्‍ट्रीय तथा अंतरराष्‍ट्रीय क्षेत्र में युगांतरकारी घटना है । इसी दिन भारत ने यह घोषणा की कि अब यह देश परमाणु शक्‍त‌ि-संपन्न राष्‍ट्र बन चुका है । इसी दिन से भारत की रक्षानीति में नया अध्याय आरंभ हो गया था । भारत की विदेश नीति पाँच दशक पुरानी है; जबकि परमाणु नीति इसी घटना के साथ आरंभ हुई ।
राष्‍ट्रीय स्तर पर इन परीक्षणों के बाद यह आवश्यकता उभरकर सामने आई कि परमाणु शक्‍त‌ि- संपन्न राष्‍ट्र के रूप में भारत को अधिक सुस्पष्‍ट नीति तैयार करनी चाहिए । अब, हमें विश्‍वसनीय प्रतिनिवारण क्षमता (deterrance) के सिद्धांत एवं कार्यनीति पर विचार करना है तथा आवश्यक कमांड और नियंत्रण प्रणालियों को आवश्यकता के अनुरूप बनाना है, ताकि आकस्मिक रूप से (दुर्घटनावश) या गलत अनुमान से होनेवाले परमाणु संबंधी खतरे की संभावना कम-से-कम की जा सके ।
निरस्त्रीकरण से अप्रसार की ओर मुड़ने तथा अप्रसार व्यवस्था के दबावों के सापेक्ष भारत द्वारा गए परीक्षणों तथा परमाणु शक्‍त‌ि के बारे में निर्णय लिया गया है । भारत इस व्यवस्था के फंदों को तोड़ पाने में सफल हो गया है । इन बाधाओं से परमाणु नीति के संदर्भ में भारत द्वारा अपनाए गए खुले विकल्प ‘ पर अप्रासंगिक दबाव बढ़ रहा था । क्षेत्रीय स्तर पर इन परीक्षणों से यह प्रमाणित हो गया कि इस क्षेत्र में लंबे समय से परमाणु और मिसाइल का प्रसार हो रहा है तथा यह भी स्पष्‍ट हो गया कि यह प्रसार किस सीमा तक हो चुका है ।
एक ओर परमाणु शक्‍त‌ि-संपन्न राष्‍ट्र तथा दूसरी ओर चीन और पाकिस्तान के बीच रणनीति-विषयक सहयोग से भारत की सुरक्षा के प्रति नकारात्मक निहितार्थों के साथ-साथ इनके आधार भी तैयार होने लगे थे । परमाणु परीक्षणों से भारत रणनीति-विषयक माहौल को नया रूप देना चाहता है, दिन पर दिन बढ़ती जा रही विषमता दूर करना चाहता है तथा संक्रांति के दौर से गुजर रहे विश्‍व के सामने खड़ी सामरिक अनिश्‍च‌ितताओं से निपटने के लिए अपनी क्षमताएँ बढ़ाना चाहता है, ताकि अपनी सुरक्षा तथा मूल हितों को भी बचाया जा सके ।
इस पुस्तक में इन सभी मुद‍्दों का पता लगाने तथा इनका विश्‍लेषण करने का प्रयास किया गया है, ताकि विभिन्न स्तरों पर आवश्यक तार्किक नीति संबंधी दृष्‍ट‌िकोण एवं वस्तु-स्थिति का आकलन किया जा सके । परमाणु राष्‍ट्र के रूप में भारत के अम्युदय से जुड़ी जटिलताओं पर विभिन्न दृष्‍ट‌िकोणों से विचार किया गया है । इस प्रक्रिया में वस्तु-स्थिति की सही तसवीर पेश करने की कोशिश की गई है । महत्त्वपूर्ण घटनाक्रमों के तुरंत बाद इस पुस्तक में विशद विषय-वस्तु तथा गहन विश्‍लेषण प्रस्तुत किया गया है । इसीके साथ-साथ राष्‍ट्रीय और अंतरराष्‍ट्रीय क्षेत्र में विद्यमान महत्वपूर्ण मसलों का भी सम्यक् अध्ययन किया गया है ।

Yugantarikari by Shubhangi Bhadbhade

SKU: 8173155542

युगांतरकारी

‘गुरुजी, आप इतना भ्रमण करते हैं। हर रोज नए गाँव, नए प्रदेश, नई भाषाएँ, नई राहें। आपको सबकुछ नया या अपरिचित जैसा नहीं लगता?’
‘कभी नहीं; एक बार हिंदुस्थान को अपना समझ लिया तो सभी देशवासी अपने परिवार जैसे लगते हैं। आप भी एक बार मेरे साथ चलें—लेकिन आत्मीयता के साथ—तो देखेंगे कि आपको भी सारा देश अपने घर, अपने परिवार जैसा प्रतीत होगा।’
‘गुरुजी, आप इतनी संघ शाखाओं में जाते हैं, प्रवास करते हैं। क्या आपको लगता है कि पचास वर्षों के पश्‍चात‍् संघ का कुछ भविष्य होगा?’
‘अगले पचास वर्ष ही क्यों, पचास हजार वर्षों के पश्‍चात‍् भी संघ की आवश्यकता देश को रहेगी, क्योंकि संघ का कार्य व्यक्‍ति-निर्माण है। जिस वृक्ष की जड़ें अपनी मिट्टी से जुड़ जाती हैं, भूगर्भ तक जाती हैं, वह कभी नष्‍ट नहीं होता। दूर्वा कभी मरती नहीं, अवसर पाते ही लहलहाने लगती है।
‘संस्कृति व जीवन-मूल्यों पर आधारित, संस्कारों से निर्मित, साधना से अभिमंत्रित संघ अमर है और रहेगा। उसके द्वारा किया जा रहा राष्‍ट्र-कार्य दीर्घकाल तक चलनेवाला कार्य है।’
—इसी पुस्तक से

रा.स्व. संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्री माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ‘गुरुजी’ का जीवन त्यागमय व तपस्यामय था। वे प्रखर मेधा-शक्‍तिवाले, अध्यात्म-ज्ञानी एवं प्रभावशाली वक्‍ता थे। आधुनिक काल के वे एक असाधारण महापुरुष थे।

प्रस्तुत है—आदर्शों, महानताओं एवं प्रेरणाओं से युक्‍त जीवन पर आधारित एक कालजयी उपन्यास।

Loktantra Ke Paye by Manohar Puri

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लोकतंत्र के पाये
अनूठा व्यंग्य शिल्पी
मनोहर पुरी में वैचारिक संप्रेषण संसार रचने की अपूर्व विशेषता है। वे दुखती रग को पहचानते हैं। वे उपदेष्‍टा नहीं हैं, किंतु एक उपदेशकीय दृष्‍टि की सृष्‍टि अवश्य ही रच देते हैं। उनके व्यंग्य का कैनवास बहुआयामी तथा सर्वग्राही है। उनकी व्यंग्य-क्षुधा किसी भी विद्रूपता या विडंबना को वर्ज्य नहीं मानती।
—बालेंदु शेखर तिवारी

स्पष्‍ट दृष्‍टिकोण का व्यंग्यकर्मी
मनोहर पुरी एक ऐसे सजग, चिंतनशील रचनाकार हैं जो अपने स्पष्‍ट दृष्‍टिकोण एवं विचारधारा के तहत राजनीतिक क्षेत्र में व्याप्‍त विसंगतियों की व्यंग्यात्मक आलोचना कर रहे हैं। उनकी रचनाओं में व्यंग्य के नए शिल्प की पकड़ दिखाई देती है। गद्यात्मक व्यंग्य रचनाओं में पद्य की एक अलग लय है, जो पाठक को कविता का आनंद देती है।
—प्रेम जनमेजय

विशिष्‍ट शैली के रचनाकार
मनोहर पुरी का व्यंग्य-संसार बहुत विस्तृत है। उन्होंने राजनीति, समाज, संस्कृति, प्रशासन, धर्म आदि क्षेत्रों की विसंगतियों की बहुत गहरे तक जाकर पड़ताल की है। उनकी शैली में एक अलग किस्म का चुटीलापन है।
—सुभाष चंदर

तेजाबधर्मी व्यंग्य हस्ताक्षर
मनोहर पुरी के व्यंग्य में एक पत्रकार की खोजी ‘दीठ’ है, जो उनके लेखकीय कैनवास को विराट् आयाम देती है। उनकी व्यंग्य भाषा में एक निश्‍च‌ित ‘राग’ है, जो उसे काव्यमय बना देता है। इसीलिए इनका व्यंग्य-शूल तुकांत शैली की पंखुड़ियों में छुपकर चुभन का दंश देता है।
—नंदलाल कल्ला

Naya Masseha by Ram Shanker Agnihotri

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अपने देश के सामाजिक और राजनीतिक चरित्र का जो भी अच्छा स्वरूप आज हमें दिखाई देता है उसके लिए जिन महापुरुषों की ध्येय-दृष्‍ट‌ि और उदात्त जीवनादर्श प्रेरक रहे हैं, उनमें डॉ. आंबेडकर का स्थान अग्रिम पंक्‍त‌ि में है । उनके लिए परिस्थिति अत्यंत प्रतिकूल थी । जन्म ऐसी जाति में हुआ था, जो जाति- प्रथा की श्रेष्‍ठ कनिष्‍ठतावाली रचना में निम्न स्तर पर थी । किसी के लिए भी उन कंटीले बंधनों से बाहर निकलना आसान नहीं था । डॉ. आंबेडकर की महिमा यह हें कि वे इन कँटीले बंधनों को तोड़कर बाहर निकले । इतना ही नहीं, उन्होंने तो अपने समाज-बांधवों को बंधनों से मुक्‍त होने का रास्ता भी बताया-और केवल बताया ही नहीं, अपने आचरण से उसे प्रशस्त भी बनाया ।
डॉ. आंबेडकर की जीवन-गाथा को अनेक भाषाओं में अनेक लेखकों द्वारा लिपिबद्ध किया गया है । उन सबका अपना महत्व है । भविष्य में भी नए लेखक उनके लंबे जीवन के विभिन्न पहलुओं को नई दृष्‍ट‌ि से देखेंगे और उस दृष्‍ट‌ि को शब्द- सृष्‍ट‌ि में बदलने का प्रयास करेंगे । श्री अग्निहोत्री ने डॉ. आबेडकर को उनके जीवन काल में घटित घटनाचक्र के रूप में प्रस्तुत किया है ।
इस जीवनचरित की उल्लेखनीय विशेषता यह है कि यह घटनाओं का संकलन मात्र नहीं है और न यह मात्र जीवनवृत्त ही है । यह डॉ. आंबेडकर के विराट‍् व्यक्‍त‌ित्व और कालजयी कृतित्व को उपन्यास की शैली में सरल तथा सुबोध भाषा के माध्यम से सामान्य पाठकों तक पहुँचाने का अर्थपूर्ण प्रयास है ।

1000 Samjashastra Prashnottari by Mohananand Jha

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एक पृथक् व स्वतंत्र विषय के रूप में समाजशास्त्र का प्रादुर्भाव पिछली शताब्दी में ही हुआ है। मनु, कौटिल्य, कन्फ्यूशियस, लाओत्से, प्लेटो, सुकरात तथा अरस्तु आदि प्रसिद्ध सामाजिक दार्शनिक हुए। सामाजिक घटनाओं के व्यवस्थित व क्रमबद्ध अध्ययन तथा विश्लेषण हेतु एक पृथक् एवं स्वतंत्र विज्ञान समाजशास्त्र का नामकरण फ्रांसीसी विद्वान् ऑगस्त कॉम्ट (1798-1857) ने किया। सन् 1876 में सर्वप्रथम येल विश्वविद्यालय, अमेरिका में समाजशास्त्र के अध्ययन-अध्यापन का कार्य प्रारंभ हुआ। भारत में 1914 में बंबई विश्वविद्यालय में इस विषय का अध्ययन कार्य प्रारंभ हुआ।
वर्तमान में अनेक विश्वविद्यालयों में समाजशास्त्र से संबंधित शोध हो रहे हैं। आज समाजशास्त्र एक स्वतंत्र एवं प्रतिष्ठित विषय के रूप में विद्यालय से विश्वविद्यालय तक के विविध पाठ्यक्रमों में शामिल है।
प्रस्तुत पुस्तक में प्रश्नोत्तरी शृंखला के अंतर्गत समाजशास्त्र के अति महत्त्वपूर्ण पक्षों को उद्भाषित व स्पष्ट करने का सार्थक प्रयास किया गया है। जिससे न केवल समाजशास्त्र के शिक्षार्थी एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षार्थी, बल्कि इस विषय के जिज्ञासु पाठक भी लाभान्वित होंगे।

Krishnam Vande Jagadgurum by Dinkar Joshi

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कृष्ण विचलित नहीं हुए । अपने खुद के वचन की यथार्थता मानो सहजभाव से प्रकट होती है । नाश तो सहज कर्म है । यादव तो अति समर्थ है; फिर कृष्ण- बलराम जैसे प्रचंड व्यक्‍त‌ियों से रक्षित हैं- उनका सहज नाश किस प्रकार हो? उनका नाश कोई बाह्य शक्‍त‌ि तो कर ही नहीं सकती । कृष्ण इस सत्य को समझते हैं और इसलिए माता गांधारी के शाप के समय केवल कृष्ण हँसते हैं । हँसकर कहते हैं – ‘ माता! आपका शाप आशीर्वाद मानकर स्वीकार करता हूँ; कारण, यादवों का सामर्थ्य उनका अपना नाश करे, यही योग्य है । उनको दूसरा कोई परास्त नहीं कर सकता । ‘ कृष्ण का यह दर्शन यादव परिवार के नाश की घटना के समय देखने योग्य है । अति सामर्थ्य विवेक का त्याग कर देता है और विवेकहीन मनुष्य को जो कालभाव सहज रीति से प्राप्‍त न हो, तो जो परिणाम आए वही तो खरी दुर्गति है । कृष्ण इस शाप को आशीर्वाद मानकर स्वीकार करते हैं । इसमें ही रहस्य समाया हुआ है ।
-इसी पुस्तक से
न केवल भारतीय साहित्य में अपितु समग्र विश्‍व साहित्य में श्रीकृष्ण जैसा अनूठा व्यक्‍त‌ित्व कहीं पर उपलब्ध नहीं है । संसार में लोकोत्तर प्रतिभाएँ अगण्य हैं; परंतु पूर्ण पुरुषोत्तम तो श्रीकृष्ण के अलावा अन्य कोई नहीं है । श्रीकृष्ण के किसी निश्‍च‌ित रूप का दर्शन करना असंभव है । बाल कृष्ण से लेकर योगेश्‍वर कृष्ण तक इनके विभिन्न स्वरूप हैं । प्रस्तुत पुस्तक में श्रीकृष्ण के चरित्र को बौद्धिक स्तर से समझने का प्रयास किया गया है ।
वि‍श्‍वास है, पाठकों को यह प्रयास पसंद आएगा ।

Kamar Dard: Karan Aur Bachav by Dr. Raju Vaishya

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कमर दर्द : कारण और बचाव

आधुनिकता एवं विलासिता के कारण कमर दर्द ने आज भयानक महामारी का रूप ले लिया है। कमर दर्द की व्यापकता का सबसे बड़ा कारण अनुपयुक्त जीवन-शैली है, जिसमें वांछित सुधार करके हम इस कष्ट से बच सकते हैं। ऐसे अनेक उपाय हैं जिनकी मदद से कमर दर्द को नियंत्रण में रखकर सामान्य एवं सक्रिय जीवन का आनंद लिया जा सकता है। लेकिन जानकारियों के अभाव में लोग कमर दर्द के अभिशाप से मुक्त नहीं हो पाते।
इस पुस्तक का उद्देश्य कमर दर्द, उसकी रोकथाम और उसके इलाज के संपूर्ण पहलुओं की सही और वैज्ञानिक जानकारी देना है। पुस्तक में कमर दर्द से बचाव के तरीकों के अलावा उसके उपचार की विभिन्न पद्धतियों की विस्तार से व्याख्या की गई है।
विश्वास है, वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक्स सर्जन डॉ. राजू वैश्य द्वारा लिखित यह व्यावहारिक पुस्तक लोगों को कमर दर्द से निजात दिलाने में सहायक सिद्ध होगी।

Bharat Ke Mahan Sant by Baldev Vanshi

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भारत के महान् संत
सभ्यता के प्रभातकाल से ही मानवीय, संवेदनात्मक, प्रेमिल, सहिष्णु, त्याग, क्षमा, दया, सद्व्यवहार को महत्त्व देनेवाले लोग, साधु-संन्यासी और फकीर-औलिया इस भारत-भू पर अवतरित होते रहे हैं, जो अपना संपूर्ण जीवन जनमानस की सुप्‍त आत्मा को जगाने, उसे उन्नत करने, परमार्थ एवं समाजड़कल्याण में सहर्ष लगाते रहे हैं।
संतों की संस्कृति वेदना-संवेदना की संस्कृति है, यथार्थ की धरती पर अवतरित अध्यात्मभाव की संस्कृति है। घोर कष्‍टों, संकटों, अभावों और घोर अपमानों को सहकर दूसरों को उठाने, खड़ा करने और उन्हें सद्मार्ग दिखाने का महाकर्म है— संतों का जीवन।
‘भारत के महान् संत’ में संतों की पूरी पाँत—कबीर, नामदेव, रैदास, दादू, नानक, मलूक, मीरा, फरीद, तिरुवल्लुवर इत्यादि के परोपकारी जीवन का सांगोपांग वर्णन है। विद्वान् लेखक का मानना है कि भारतीय संतों की समुज्ज्वल परंपरा आज भारत ही नहीं, विश्‍व के संकटों के निवारण में महती सहायक हो सकती है। संत परंपरा ही संपूर्ण विश्‍व को तमाम विघ्न-कष्‍टों से बचाकर वास्तविक विकास के मार्ग पर अग्रसर कर सकती है।
जीवन के आध्यात्मिक विकास एवं तात्त्विक भाव उत्पन्न करने में सहायक प्रेरणाप्रद पुस्तक।

Ek Aur Kunti by Vishnu Prabhakar

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हिंदी कथा-साहित्य के सुप्रसिद्ध गांधीवादी रचनाकार श्री विष्णु प्रभाकर अपने पारिवारिक परिवेश से कहानी लिखने की ओर प्रवृत्त हुए बाल्यकाल में ही उन दिनों की प्रसिद्ध ‘ उन्होंने पढ़ डाली थीं । उनकी प्रथम कहानी नवंबर 1931 के ‘हिंदी मिलाप ‘ में छपी । इसका कथानक बताते हुए वे लिखते हैं-‘ परिवार का स्वामी जुआ खेलता है, शराब पीता है, उस दिन दिवाली का दिन था ।

Dharam Aur Sampradayikta by Narendra Mohan

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धर्म की इस विकृति व भ्रांति के साथ स्वार्थ व अहंकार इतना अधिक जुड़ गए है कि सामान्य व्यक्‍ति धर्म की वास्‍तविक अवधारणा को भूलकर इस विभाजित चेतना को ही सत्‍य मानने लगा है। विभाजित व स्वार्थ प्रधान चेतना से उपजे जो वि‌भ‌िन्‍न धर्म हैं उनमे से अनेक केवल अपने अहंकार, स्थार्थ व आक्रामकता के काराण ही फल-फूल रहे हैं। धर्म का आवरण लेकर अपनाई गई यह आक्रामकता ही ‘ सांप्रदायिकता’ है। इस आक्रामकता को कहीं राजनीतिक कारणों से अपनाया गया और कहीं आर्थिक कारणों से तो कहीं सामाजिक कारणों से। आज स्थिति इतनी बिगड़ी हुई है कि अपना- अपना तथाकथित धार्मिक दर्शन थोपने के लिए धनबल, छलबल व बाहुबल का खुलकर प्रयोग हो रहा है और वह भी सभ्यता व संस्कृति के नाम पर ।
धर्म का लक्ष्य है भेदजनित भ्रांति व अज्ञान का निवारण। लेकिन वस्तुस्थिति यह है कि यह निवारण भी वैयक्‍तिक स्तर पर ही अनुभूति के माध्यम से करना होगा । इस दृष्‍टि से भेद की सत्ता के अस्तित्व को जगत् के स्तर पर अस्वीकार नहीं किया जा सकता। जैसेकि महासागर में लहर के अस्तित्व को अस्वीकार नहीं किया जा सकता, वैसे ही विराट‍् चैतन्य के महासागर में भेद रूपी लहर को स्वीकार करना ही होगा; पर ध्यान रहे कि वास्तविक अस्तित्व लहर का नहीं है वरन् महासागर का है ।
प्रस्तुत पुस्तक में लेखक ने जीवन के सभी पक्षों को लेकर समाज, धर्म, देश आदि अनेक विषयों पर अपने भावों को व्यक्‍त किया है।

Bharat Mein Paryatan by Rajesh Kumar Vyas

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हमारे देश में जितनी विविधता है, उतनी विश्व के किसी भी अन्य देश में नहीं है। हिमाच्छादित पहाड़ियाँ, हिमखंड, गरम जल के फव्वारे, गुफाएँ, सम्मोहित करनेवाली झीलें, दूर तक पसरा रेगिस्तान, समुद्र तट, खान-पान, रहन-सहन, त्योहारों के आकर्षण आदि के बारे में जितना कहा जाए उतना ही कम है। यही वह देश है जहाँ सभी रुचियों के पर्यटकों के लिए वैविध्यपूर्ण छटा के पर्यटन स्थल हैं। यही नहीं, पर्यटन के लिहाज से भारत को एकमात्र ऐसा देश भी कहा जा सकता है जिसमें पर्यटक दूसरे देशों के मुकाबले सिर्फ एक तिहाई या इससे भी कम खर्च पर घूमने-फिरने का आनंद उठा सकते हैं।
तेजी से फैल रहे एशियाई बाजारों को देखते हुए भारत के लिए पर्यटन के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण भागीदारी निभाने का यही सही समय है। इस दायित्व की पूर्ति के लिए आवश्यक है पर्यटन शिक्षा। पर्यटन शिक्षा की भी उपादेयता यही है कि इसके जरिए राष्ट्रें में बेहतर पर्यटन वातावरण निर्मित किया जा सके। ऐसा यदि होता है तो पर्यटन के जरिए आतंकवाद, हिंसा, आंदोलन, जातिवाद जैसी समस्याओं से स्वत: ही निजात पाई जा सकती है। पर्यटन परस्पर सौहार्द और जीवन स्तर को उत्कर्ष पर ले जाने का बेहतरीन माध्यम बन सकता है
ÖæÚUÌ ×ð´ ÂØüÅUÙ में पर्यटन के सैद्धांतिक पक्ष को व्यावहारिक अनुभवों के साथ प्रस्तुत किया गया है। विश्वास है विश्वविद्यालय पाठ्यक्रमें, पर्यटन संगठनों, नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं को ध्यान में रखकर लिखी गई यह पुस्तक पर्यटन प्राध्यापकों, पर्यटन उद्योग में नियोजित व्यक्तियों, पर्यटकों तथा विद्यार्थियों के लिए समान रूप से लाभकारी सिद्ध होगी।

Hridaya Rog: Karan Aur Bachav by Dr. Purushottam Lal

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हृदय रोग : कारण और बचाव

आज के समय में हृदय रोग और दिल के दौरे असामयिक मृत्यु के सबसे बड़े कारण हैं। विकासशील देशों में हृदय की बीमारियाँ महामारी बनकर उभर रही हैं।
कुछ साल पहले तक अधेड़ों और प्रौढ़ों का रोग माने जानेवाले हृदय रोग अब नौजवानों को भी अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं। अब 35 से 44 वर्ष की उम्र से ही लोग इसके चंगुल में आने लगे हैं और 55 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए तो हृदय रोग मौत का पर्याय ही बन गया है। भारत में भी प्रतिवर्ष लगभग 25 लाख लोग दिल के दौरे के कारण असामयिक मृत्यु के ग्रास बन रहे हैं।
प्रतिष्‍ठित व अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पुरुषोत्तम लाल ने प्रस्तुत पुस्तक में व्यावहारिक दृष्‍टि से हृदय रोग होने के कारणों पर उपयोगी चर्चा की है। साथ ही इस घातक रोग से बचाव के संबंध में बड़ी ही सरल, सुविधाजनक और सटीक जानकारी दी है।

Yagya by Dattatraya Kher / Sailja Raje

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उपन्यास-लेखन में एक एकदम नई विधा को लेकर ‘ यज्ञ ‘ लिखा गया है । यह उपन्यासपरक जीवनी न होकर जीवनपरक उपन्यास है । किसी महानायक के महानिर्वाण के तुरंत बाद लिखा गया यह शायद पहला ही उपन्यास है ।
मराठी में यह नई विधा पहली बार लाने का श्रेय ‘ यज्ञ ‘ उपन्यास को जाता है । वास्तव में सावरकरजी सरीखे महानायक के जीवन पर तो एक सशक्‍त महाकाव्य रचा जा सकता है । इस उपन्यास में महाकाव्य के सभी रस, साहित्य के सभी प्रकार, सावरकरजी के व्याख्यान, उनकी काव्य-रचनाएँ नाटकीय प्रसंग आदि का ताना-बाना ऐसी कुशलता से बुना गया है कि न तो उसकी रोचकता कहीं कम हुई है, न ही कथ्य के साथ कोई अन्याय ।
महानायक के प्रति असीम भक्‍त‌िभाव रखते हुए भी उसके जीवन की वास्तविकता के साथ पूरी प्रामाणिकता लेखकों ने रखी है । किसी महानायक के जीवन को ऐसी ललित शैली में एक नई विधा में बाँधने का ‘ यज्ञ ‘ अपने में पहला उदाहरण है । उपन्यास जहाँ विधा में अभिनवता लिये है, वहीं वह रसप्रधान एवं रोमांचक भी है । कल्पना से सत्य अधिक सुंदर एवं अद‍्भुत होता है, इस कथन को उपन्यास अपने पन्ने-पन्ने में चरितार्थ करता है ।
कथ्य और उसकी रचना, दोनों दृष्‍ट‌ियों से, ‘ यज्ञ ‘ अभूतपूर्व रचना है । मराठी सारस्वत के लिए तो यह एक ललाम है ही, हिंदी के माध्यम से भारत भारती के भंडार को भी समृद्ध करने की क्षमता इसमें है ।

Gathbandhan Ki Rajneeti by N.M. Ghatate

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भारतीय राजनीति गठबंधन के दौर में न केवल प्रवेश कर चुकी है, गठबंधन की सरकारों का गठन अब भारतीय लोकतंत्र का वर्तमान और आगामी अतीत नजर आ रहा है। राष्ट्रीय दलों ही नहीं, क्षेत्रीय दलों की पैठ मतदाताओं में जितनी गहरी होती जाएगी, यह चलन बढ़ेगा। क्षेत्रीय मुद्दों पर ही नहीं, राष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपने क्षेत्रीय दलों पर मतदाता का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि मतदाता चाहता है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी उसका प्रतिनिधित्व उसके क्षेत्रीय दल करें। पिछले लगभग एक दशक से मतदाताओं ने गठबंधन की सरकारों के गठन का जनादेश दिया है।
अपने प्रधानमंत्रित्व काल में श्री वाजपेयी ने जो उपलब्धियाँ हासिल की हैं उन्हें सहज शब्दों में कहा जा सकता है-जो कहा वह कर दिखाया। प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने के बाद भी उनकी कथनी और करनी एक ही बनी रही। अपनी बात को स्पष्ट और दृढ़ शब्दों में कहना अटल जी जैसे निर्भय और सर्वमान्य व्यक्ति के लिए सहज और संभव रहा है।
मुद्दा चाहे पड़ोसियों से संबंध सुधारने की दिशा में चीन यात्रा का हो, लाहौर बस यात्रा हो या कारगिल से दुश्मन को खदेड़ना, आगरा वार्ता हो या फिर से खेल संबंधों की बहाली, परमाणु परीक्षण हो या डन्ल्यू. टी. ओ. पर दो टूक राय या अमेरिका की मध्यस्थता को ठुकराने का फैसला। अटल जी के शासनकाल में देश की अर्थव्यवस्था ने नई ऊँचाइयों को छुआ है। विदेशी मुद्रा भंडार, सूचना प्रौद्योगिकी, आउट सोर्सिंग, किसान बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, ग्रामीण सड़क योजना, स्वर्ण चतुर्भुज राजमार्ग, नदियों का एकीकरण, सागर माला, दूरसंचार सुविधाओं का विकास, ऊर्जा क्षेत्र का विस्तार जैसी दर्जनों योजनाएँ हैं जो अटल जी के कार्यकाल में शुरू हुई और जो आगामी अतीत में भारत को विकसित देशों की पंक्ति में स्थान दिलाने में सफल होंगी।
भारतीय राजनीति को अटल जी का योगदान है-समन्वय की राजनीति, सामंजस्य की राजनीति, मिल- जुलकर राष्ट्रहित में आगे बढ़ने की दिशा देना।

Share Market Mein 10,000 Ki Investment Se 100 Crore Kaise Kamaen by Shyam Sundar Goel

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शेयर मार्केट के बहुचर्चित नाम और सफल रणनीतिकार श्री श्यामसुंदर गोयल ने शेयर बाजारों में निवेश करने के लिए आसान प्रणाली और सूत्र विकसित किए हैं। उनके छात्रों ने इनकी काफी प्रशंसा भी की है कि शेयर बाजार के बारे में समझना और पैसे कमाना बहुत आसान है। उन्होेंने कुछ सूत्र-सिद्धांत बनाए हैं, जो शेयर बाजार में सफल होने में आपकी मदद करेंगे। ये भारत में आसानी से काम करते हैं और बहुत सारी वर्कशॉप करने के बाद इन सिद्धांतों को पुस्तक के माध्यम से निवेशकों तक पहुँचाने की दृष्टि से उन्होंने यह व्यावहारिक पुस्तक लिखी है। उनके पास काम करने की समय-सीमा है जबकि पुस्तक की कोई सीमा नहीं है। यह किसी भी व्यक्ति के लिए आसानी से सुलभ हो सकती है। उनके लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है भारत के चारों कोनों में खूब सारे सेमिनार करना। ऐसी स्थिति में इस पुस्तक के माध्यम से उन्होंने अपना अनुभव, ज्ञान और दक्षता साझा की है ताकि पाठक और निवेशक इसमें दिए सूत्रों को व्यवहार में लाकर शेयर मार्केट में सही इन्वेस्टमेंट करकेकरोड़ों रुपए कमा सकें।
हर निवेशक के लिए एक आवश्यक पुस्तक।

Bharatiya Sanskriti Ke Rakshak Sant by Justice Shambhu Nath Srivastava

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सनातन भारतीय संस्कृति सृष्टि के आदिकाल से ही अपने चिरंतन मानवीय मूल्यों के साथ प्रवाहित रहती है। विश्व के अधिकांश देशों में जहाँ इसलाम पहुँचा, वहाँ के निवासी मुसलिम बना दिए गए। भारत में 712 ई. से सत्रहवीं शताब्दी तक इसलाम का शासन विभिन्न क्षेत्रों में था, परंतु 1000 वर्ष के इस विदेशी मुसलिम शासन काल में भारतीय जनमानस पर विदेशी आक्रमण की समस्त क्रूर विद्रूपताओं के बावजूद अपने चिरंतन उदात्त मानवीय मूल्यों के संवाहक संतों के कारण यह भारतीय संस्कृति आज भी अजस्र रूप से प्रवाहित हो रही है। इस राजनीतिक पराभव काल में भारत के महान् संतों ने संपूर्ण भारत के गाँव-गाँव में हिंदू जनता को सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं आध्यात्मिक रूप से पूरी तरह सुरक्षित रखा।
प्रस्तुत पुस्तक में ऐसे स्वनामधन्य पूज्यपाद संतों व उनके जीवन चरित का उल्लेख किया गया है, जिनके कारण भारतीय संस्कृति आज भी संरक्षित है।
गौरवशाली भारतीय संस्कृति के ऐसे रक्षक संतों का पुण्य स्मरण है यह पुस्तक, जिनका प्रेरणाप्रद जीवन हर हिंदू के धर्म-आस्था-श्रद्धा और विश्वास को बल एवं शक्ति देता है।

Meri Unesco Yatra by Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’

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यूनेस्को या संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन विभिन्न देशों, समुदायों, संस्कृतियों और नागरिकों के बीच मानवीय मूल्यों की स्थापना को संभव बनाने के लिए एक सशक्त एवं व्यापक मंच प्रदान करता है। यूनेस्को का प्रमुख उद्देश्य शांति स्थापना, गरीबी उन्मूलन, सतत विकास और शिक्षा के माध्यम से विज्ञान, संस्कृति, संचार और सूचना के क्षेत्र में योगदान करना है।
यूनेस्को के लक्ष्यों के केंद्र में अब प्राकृतिक विज्ञान और पृथ्वी के संसाधनों का प्रबंधन भी आ चुके हैं। इसके अंतर्गत विकसित और विकासशील देशों में संसाधन प्रबंधन और आपदा स्थिरता में सतत विकास प्राप्त करने के लिए पानी और पानी की गुणवत्ता, महासागर की रक्षा और विज्ञान तथा इंजीनियरिंग प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना शामिल है।
भारत में मानव कल्याण संदर्भित चिंतन हजारों वर्ष पुराना है। हमारे वेदों, शास्त्रों एवं अन्य ग्रंथों में शासन करनेवालों को धर्म के आधार पर आचरण करने का परामर्श दिया गया है। इस दृष्टि से देखें तो सामाजिक और मानव विज्ञान पर ध्यान केंद्रित करते हुए यूनेस्को भी बुनियादी मानव अधिकारों के संरक्षण और संवर्धन को न केवल बढ़ावा देता है, बल्कि भेदभाव और नस्लवाद से लड़ने के लिए पूरे विश्व को तैयार करता है।
मानव कल्याण के लिए सतत सक्रिय यूनेस्को की भूमिका, उसके कार्य-क्षेत्र, प्रभाव और संभावनाओं के विषय में प्रामाणिक जानकारी देती रोचक एवं पठनीय कृति।

Sahejee Hui Chitthiyan by Vikramaditya

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नारी मन की विभिन्न परतों को उजागर करती एक आधुनिक नारी की जीवनयात्रा कथा, जो अपने कठिन संघर्ष एवं समरस सोच के माध्यम से अंततः अपना सामाजिक एवं भावनात्मक पड़ाव पा ही लेती है।
कथा शुरू होती है तीन शब्दों से—काम, काम और काम…और विराम लेती है इन्हीं तीन शब्दों पर काम, काम और काम। लेकिन अंतर है इस आदि और अंत में। अंतर क्या है, क्यों है?
इसका उत्तर ढूँढ़ने के लिए अनिता से मिलना जरूरी है।

English Mein Payen Adhiktam Marks by G.D. Pahinkar

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अंग्रेजी अंतरराष्ट्रीय व्यवहार की भाषा है, फिर भी उससे डरने की कोई बात नहीं। इस पुस्तक की मदद से अंग्रेजी की परीक्षा में भरपूर मार्क्स प्राप्त करना बहुत आसान है। सभी कक्षा के विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी करते समय और अंग्रेजी भाषा की मूलभूत जानकारी प्राप्त करने में इस पुस्तक से काफी मदद मिल सकती है।
पुस्तक के स्पष्ट वैशिष्ट्य
1. सभी कक्षा के लिए, हिंदी, अंग्रेजी और सेमी अंग्रेजी माध्यम के लिए उपयुक्त।
2. सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यावश्यक पायाभूत अभ्यास।
3. सभी कक्षाओं के लिए उपयुक्त एवं अत्यावश्यक सभी घटकों का समावेश।
4. आवश्यक जगहों पर दिए हुए उदाहरण और अभ्यास के लिए हर प्रकरण के बाद अभ्यास।
5. हिंदी और अंग्रेजी—ऐसी दोनों भाषाओं के इस्तेमाल की वजह से समझने में आसान।
अंग्रेजी पर प्रभुत्व चाहनेवाले हर एक विद्यार्थी के संग्रह में हो ऐसी संदर्भ पुस्तक।

Parivartan Ki Ore  by Shiwanand Dwivedi, anant Vijay

SKU: 9789386300249

कहा जाता है कि परिवर्तन प्रकृति का नियम है। लोकतंत्र में भी परिवर्तन होते रहते हैं, लेकिन सही अर्थों में परिवर्तन, जो देश, काल और परिस्थिति पर अपनी अमिट छाप छोड़ सके, ऐसा कम ही देखने को मिलता है। राजनीति में वर्षों बाद ऐसे मौके आते हैं, जब वह परिवर्तन की गवाह बनती है। राजनीति में सही अर्थों में परिवर्तन के लिए मजबूत इच्छाशक्ति और देश के सर्वांगीण विकास हेतु कुछ कर गुजरने की तमन्ना होना आवश्यक है। भारत को जब आजादी मिली थी तो इतिहास ने एक करवट ली। जनाकांक्षा हिलोरें ले रही थीं और आजादी के रोमांटिसिज्म में जनता दशकों तक परिवर्तन की अपेक्षा नहीं कर रही थी। आजादी के करीब सड़सठ साल बाद जनता ने देश में परिवर्तन की आकांक्षा से राजनीतिक बदलाव पर अपनी मुहर लगाई। भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और साथ ही मिला पूरा करने के लिए जनता की अपेक्षाओं का अंबार। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाईवाली सरकार ने इन जनाकांक्षाओं पर खरा उतरने के लिए कई योजनाओं और नीतियों का ऐलान किया और इन्हें कार्यान्वित करने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। इन योजनाओं के लेखा-जोखा का परिणाम है यह पुस्तक, जिसमें देशभर के पत्रकारों, ब्लॉगर्स और लेखकों ने जमीनी स्तर पर जो देखा-पाया, वो लिखा।

Doctor Mein Kya Karuin by Dr. Binda Singh

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तेज रफ्तार जिंदगी में लोगों को अपना वजूद बचाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। जीवन की महत्त्वाकांक्षाएँ उफान पर हैं। माता-पिता की बच्चों से और बच्चों की माता-पिता से उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं। पारिवारिक रिश्तों में भावनात्मक सहयोग एवं प्यार की कमी आ गई है। पति-पत्‍नी के संबंधों में अहं आ गया है। सात जन्मों का रिश्ता सात दिनों का होने लगा है। तलाक की घटनाएँ बढ़ गई हैं। युवा वर्ग एवं किशोर दिग्भ्रमित हो रहे हैं। मानसिक तनाव एवं आत्महत्या की घटनाओं ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया है। भले ही हम इंटरनेट की दुनिया में जी रहे हैं, लेकिन व्यावहारिक दुनिया से कटते जा रहे हैं। नकारात्मक मनोभाव हमारे मन में घर करते जा रहे हैं। बच्चे, किशोर, युवा, बुजुर्ग सभी के व्यवहार में आक्रामकता आ गई है। धैर्य कम हो गया है। हर व्यक्‍त‌ि किसी-न-किसी तरह मानसिक रूप से परेशान है। प्रस्तुत पुस्तक में इन बातों को ध्यान में रखकर सरल भाषा में बच्चों, किशोरों, युवा एवं बुजुर्ग को जागरूक करने की कोशिश की गई है कि वे खुद को इतना मजबूत रखें कि छोटी-छोटी परेशानियाँ उन्हें विचलित न कर सकें।
मनोविकारों और मनोरोगों को दूर कर जीवन में सकारात्मक भाव जाग्रत् कर जीने का आनंद उठाने की राह दिखाती पठनीय पुस्तक।

Sansad Mein Nitin Gadkari (2017-2019) by Rakesh Shukla

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मैं पहली बार 2014 में नागपुर से लोकसभा सांसद चुना गया। इससे पहले मैं महाराष्ट्र विधान परिषद् में 1989 से लगातार 20 वर्ष तक सदस्य रहा हूँ। वर्ष 1995 में 1999 तक मैंने महाराष्ट्र सरकार में लोक निर्माण मंत्री का कार्यभार भी सँभाला है। विधायिका और प्रशासन में काम करने का लंबा अवसर मिला। लोकसभा सदस्य के नाते एवं केंद्रीय मंत्री के रूप में मैंने संसदीय कार्य में अपना भरपूर योगदान देने का प्रयास किया है। पिछले पाँच साल में कई महत्त्वपूर्ण विधेयक मेरे द्वारा संसद् में प्रस्तुत किए गए। कई महत्त्वपूर्ण विधेयक पारित भी हुए हैं। दोनों सदनों में प्रश्नोत्तरकाल में मैंने विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों की ओर से उठाई गई समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया है। इसी दृष्टिकोण के साथ मैंने सभी दल के सांसदों की क्षेत्रीय समस्याओं को गंभीरता से लेकर उसे सुलझाने का प्रयास किया। इस पाँच साल की अवधि में मुझे नमामि गंगा, जल संसाधन और ग्रामीण विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी भी अल्पावधि के लिए मिली थी। मेरी कोशिश रही कि इन सभी मंत्रालयों के कामकाज की सही जानकारी से प्रत्येक सदस्य अवगत रहे। यह पुस्तक संसद् में मेरे द्वारा किए गए प्रयासों का संकलन है। संकलन का कार्य दो भागों में किया गया है। 2014 से 2016 तक का पहला खंड आ चुका है। इस खंड में 2017 से 2019 तक के संसदीय कार्यों का ब्यौरा है। मैं समझता हूँ कि इस संकलन से मुझे भविष्य में प्रेरणा मिलती रहेगी। इस प्रयास के लिए संपादक एवं प्रकाशक को मेरी हार्दिक शुभेच्छाएँ।
यह केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरीजी के संसदीय कामकाज का संकलन है। पिछले पाँच सालों में सड़क परिवहन, पोत परिवहन, जल संसाधन और नमामि गंगा मंत्रालय में कई महत्त्वपूर्ण काम हुए हैं। उनके काम करने के तरीके में रचनात्मक सोच तथा नए तकनीकी प्रयोग के बेजोड़ उदाहरण सामने आए हैं, जिन्हें सँजोना आवश्यक लगा। देश ने पाँच वर्ष में एक्सप्रेस-वे और जलमार्ग से यात्रा की परिकल्पना को साकार होते देखा है। यह संकलन इस उद्देश्य से किया गया है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सक्षम एवं समृद्धशाली भारत बनाने की दिशा में किए गए सतत प्रयासों में ये तथ्य साक्ष्य के रूप में कारगर भूमिका निभाएँगे। संसद् में सड़क परिवहन और जल परिवहन से संबंधित कई विधेयक प्रस्तुत किए गए। इनमें विकास व रोजगार के साथ-साथ मानवीय पक्ष भी रहा है, जैसे मोटर व्हीकल एक्ट (संशोधन) विधेयक लाने के पीछे उद्देश्य देश में हर साल होनेवाली पाँच लाख से ज्यादा सड़क दुर्घटनाओं को कम करना है; वाराणसी से हल्दिया (कोलकाता) तक जलमार्ग को मूर्त रूप देना। 2014 से 2019 के बीच श्री गडकरी ने संसद् में जो कहा, उसे पूरा करने का हरसंभव प्रयास किया। कुंभ-2019 के पहले उनकी तरफ से गंगा जल की निर्मलता के लिए किया गया अथक प्रयास सार्थक साबित हुआ। पिछले पाँच साल में गडकरीजी ने राष्ट्र विकास के विजन को जिस मिशन के तहत किया है, वह देश की उन्नति के लिए मील का पत्थर बनेगा।
—राकेश शुक्ला

Asambhav Kuchh Bhi Nahin by Ram Singh.

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प्रस्तुत कहानी-संग्रह के केंद्र में ऐसे लोग हैं, जिन्होंने कठिनाइयों और अव्यवस्था के बीच आनंद ढूँढ़ने का प्रयास किया और अपनी जिंदगी को खूबसूरती का असली जामा पहनाया। इन्होंने शारीरिक दुर्बलताओं और कठिनाइयों से गुजरते हुए विस्मयकारी कार्य करके अपनी जिंदगी को मूल्यवान और सार्थक बनाया है। विश्व के मानचित्र में ऐसे नाम अवस्थित हैं, जिनका जीवन अजीब मोड़ों से गुजरा है। विकलांगता, निर्धनता, संघर्ष-दर-संघर्ष, तनाव या अवसाद की परिस्थितियाँ उनके अनुकूल नहीं रहीं, किंतु उन्होंने अपने मनोबल, आत्मविश्वास और साहस से विषम परिस्थितियों में अपने को ढालकर जीवन को आश्चर्यजनक आयाम दिए हैं। उनके हौसलों के आगे आदमकद आपदाएँ बौनी हो गई हैं। ऐसे लोगों ने अद्भुत कार्य किए हैं, जिनसे खुद की ही नहीं, औरों की जिंदगी में भी प्रकाश आलोकित हुआ है। अरे नौजवानो! उठो, उन महापुरुषों की जिंदगी में झाँको, उनके प्रसंगों को अपनी जिंदगी से जोड़कर अपने जीवन को सफलता के शिखर तक ले जाने का प्रयत्न करो। ‘असंभव कुछ भी नहीं’ कृति पाठकों को प्रेरित करके सफलता के पथ पर अग्रसर होने का एक माध्यम है।

Bharat Darshan by Jagram Singh

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विश्व में अपने वैभव के लिए ख्यातिप्राप्त किसी भी राष्ट्र के उस वैभव की प्राप्ति के लिए किए हुए प्रयत्नों का अध्ययन ऐसे वैभव की चाह रखनेवाले सभी राष्ट्रों को बहुत बोधप्रद होता ही है। ऐसे उपलब्ध सभी अध्ययन (एक बोध) निरपवाद रूप से प्रदान करते हैं कि राष्ट्र की वैभवप्राप्ति, राष्ट्र के भाग्योदय की शिल्पकार सदा ही उस राष्ट्र की सामान्य प्रजा होती है। राष्ट्र के प्राकृतिक संसाधन, विचार एवं तत्त्वज्ञान, राजतंत्र और नेतागण, मान्यताएँ आदि बातें केवल सहायक ही होती हैं, जबकि सामान्य जनमानस का पुरुषार्थ ही राष्ट्र के भाग्योदय का प्रमुख माध्यम होता है।
स्व की जागृति के बिना व्यक्ति और समाज के पुरुषार्थ का उदय नहीं हो सकता है। हमें अपने राष्ट्र का भूगोल, प्राकृतिक संसाधन, प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विशेषताएँ, गौरवशाली इतिहास एवं पूर्वजों के पुरुषार्थ-समर्पण आदि का वास्तविक ज्ञान होने से ही व्यक्ति एवं समाज को विरासत में मिले संसाधन एवं क्षमताएँ वर्तमान स्थिति की कारण बनीं। अपने गुणों की परंपराओं को जानने से ही राष्ट्र के भाग्योदय का पथ तथा दृढ़तापूर्वक उस पथ पर चलकर ध्येय प्राप्त करने का संकल्प, विजिगीषा वृत्ति तथा आत्मविश्वास एवं संबल प्राप्त होता है।
‘भारत दर्शन’ ग्रंथ में देवस्तुति, नम्र निवेदन, भौगोलिक स्थिति, पुण्य स्थलों का स्मरण, प्राचीन वाङ्मय, धार्मिक पंथ एवं दर्शन, उन्नत विज्ञान, प्राचीन परंपराएँ, भुवनकोश एवं वैदिक-कालीन, रामायणकालीन, महाभारतकालीन विश्व रचना एवं संस्कृति, भारतवर्ष के दिग्विजयी राजाओं एवं राज्यों का विस्तार, संघर्षकालीन इतिहास, ध्येय समर्पित पूर्वजों का स्मरण, वर्तमान भौगोलिक परिदृश्य एवं राजनीतिक राजव्यवस्था, साथ ही अविस्मरणीय उपलब्धियाँ एवं पुनः संकल्प आदि का इस ‘भारत दर्शन’ ग्रंथ में समीचीन रूप से विवेचन उपलब्ध है।
भारत की प्राचीन एवं अर्वाचीन गौरवशाली परंपराओं एवं वैज्ञानिक स्वप्रमाण तथ्यों का यह सर्वश्रेष्ठ प्रतिपादक ग्रंथ है। वस्तुतः भारत राष्ट्र को समझना है तो ‘भारत दर्शन’ का अध्ययन करना ही होगा।

Apane Chanakya Swayam Banen by Smt. Renu Saini

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चाणक्य ने अपने पिता की हत्या के बाद बचपन से ही जीवन का उद्देश्य बना लिया था मगध को एक नेक, सुशील, ईमानदारी और प्रतापी राजा प्रदान करना। अपने इस संकल्प को पूर्ण करने के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिया। उन्होंने सदाचारी और पराक्रमी युवराज खोजने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया और चंद्रगुप्त को ढूँढ़ निकाला। चंद्रगुप्त का पूरा व्यक्तित्व चाणक्य के द्वारा ही गढ़ा गया था। उन्होंने अपने अनेक शिष्यों को जीवन के पाठ पढ़ाए। वे यहीं तक नहीं रुके अपितु अपने ज्ञान को ‘अर्थशास्त्र’ पुस्तक में समेट दिया। अर्थशास्त्र का ग्रंथ आज अनेक रूपों में समाज के पास उपलब्ध है; बस आवश्यकता है तो उस ग्रंथ को गहनता से पढ़ने की, समझने की और जानने की।
चाणक्य ने अपने बुद्धि-कौशल से हर तरह की बाधा से पार पाने के उपाय निकाले हुए थे, जो आज भी उपयोगी हैं। सफलता पाने के लिए यथेष्ट है कि व्यक्ति चाणक्य के व्यक्तित्व को पढ़ें, समझें, जानें और फिर खुद को पहचानें। ऐसा करके प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को एक नए बिंदु पर ले जा सकता है। वह नया बिंदु संतुष्टि, सुख, खुशी, स्वास्थ्य, समृद्धि सबकुछ प्रदान करता है।
यह पुस्तक आचार्य चाणक्य के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने को उनके अनुरूप ढालकर सफलता के शिखर छूने का एक प्रबल माध्यम है।

Lord Of Records by Dr. Harish Chandra Burnwal

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‘लॉर्ड ऑफ रिकॉर्ड्स’ पुस्तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल का तथ्यात्मक दस्तावेज है। इसमें न्यू इंडिया की उपलब्धियों का लेखा-जोखा है। इसका प्रत्येक रिकॉर्ड एक भारतवासी होने के नाते आपके गौरव और स्वाभिमान को बढ़ाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के पहले कार्यकाल पर लेखक डॉ. हरीश चंद्र बर्णवाल की बहुत ही बारीक नजर रही है। ‘लॉर्ड ऑफ रिकॉर्ड्स’ में लेखक ने 26 मई, 2014 से 30 मई, 2019 तक के 243 ऐसे रिकॉर्डों को संकलित किया है, जो वैश्विक स्तर पर या फिर भारत में पहली बार किसी प्रधानमंत्री के नाम दर्ज हुए हैं।
जब भी आजादी के बाद की भारत की विकासयात्रा इतिहास के पन्नों में दर्ज होगी तो दो ही कालखंडों की चर्चा होगी, प्रधानमंत्री मोदी से पहले और प्रधानमंत्री मोदी के बाद। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि भारत की विकासयात्रा को प्रधानमंत्री मोदी ने न सिर्फ नई गति दी, बल्कि उसे नए सिरे से परिभाषित किया, नया नजरिया दिया, नई दिशा दी और नए अंदाज में आगे बढ़ाने का संकल्पपैदा किया।
नरेंद्र मोदी भारतीय इतिहास के ऐसे इकलौते शख्स हैं, जिन पर मीडिया ने सबसे ज्यादा प्रहार किया है, जिनका विपक्ष ने सबसे अधिक विरोध किया है और जिन्हें तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग ने बार-बार कठघरे में खड़ा किया है, लेकिन हर बार नरेंद्र मोदी परिश्रम की पराकाष्ठा करके जनता की अदालत से उतना ही अधिक तप कर, खरा सोना बनकर निकले हैं। ‘लॉर्ड ऑफ रिकॉर्ड्स’ पुस्तक की अहमियत इसी संदर्भ में महत्त्वपूर्ण है।
भारत के सामान्य ज्ञान की जिज्ञासा रखने वाले विश्व के सभी प्रबुद्ध जनों के लिए यह पुस्तक मील का एक पत्थर साबित होगी।

Ramayan Ki Kahani, Vigyan Ki Zubani by Smt. Saroj Bala

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श्रीराम की जीवनगाथा
तिथि, स्थान तथा संदर्भों के साथ
1. विभिन्न वैज्ञानिक साक्ष्यों से छनकर निकले रामायण रूपी अमृत का आनंद आप भी उठाएँ।
2. इस पुस्तक में रामायण की महत्त्वपूर्ण घटनाओं के समय महर्षि वाल्मीकि द्वारा देखे गए आकाशीय दृश्यों को प्लैनेटेरियम सॉफ्टवेयर के माध्यम से आप भी देखें। निर्धारित खगोलीय तिथियों के समर्थन में दिखाई देंगे, कई रोचक चित्रों के साथ अनेकों अन्य वैज्ञानिक प्रमाण।
3. नए वैज्ञानिक उपकरणों तथा साक्ष्यों का उपयोग कर पुस्तक ने नारायण को मिथ्या बतानेवालों को असत्य सिद्ध कर रामायण में वर्णित घटनाओं की वास्तविकता एवं ऐतिहासिकता पर प्रकाश डाला है।
4. श्रीराम के जीवन में घटी मुख्य घटनाओं के क्रमिक व्योम चित्रों के साथ देखें ताँबे के वाणाग्र, सोने-चाँदी के आभूषण, पत्थरों व मोतियों के गहने, टैराकोट के बरतन तथा विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों के चित्र, जिनकी कार्बन डेटिंग इन्हें सात हजार वर्ष पुराने बताती है।
5. श्रीराम का जन्म अयोध्या में ही हुआ था और उन्होंने एक आदर्श पुत्र, एक आदर्श भाई, एक आदर्श समाज-सुधारक तथा एक आदर्श शासक के रूप में अतुलनीय उदाहरण पेश किए। पढ़ें अनेक तथ्य व प्रमाण।

Dwarka Ka Suryasta by Dinkar Joshi

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‘ दाऊ!” बलराम के पास जाकर कृष्ण ने तनिक झुककर उनसे पूछा, ” किस सोच में डूबे हैं आप?”
” कृष्ण! प्रभासक्षेत्र के आयोजन एवं गांधारी के शाप की समयावधि के बीच.. ”
” बड़े भैया!” कृष्ण जैसे चौंक उठे, ” आप… आप.. .यह क्या कह रहे हैं?”
” माधव!” बलराम ने होंठ फड़फड़ाए ” महर्षि कश्यप के शाप को हमें विस्मृत नहीं करना चाहिए । ”
” वह मैं जानता हूँ संकर्षण! उसकी स्मृति हमें ऊर्ध्वगामी बनाए ऐसी प्रार्थना हम करें । ”
” उस प्रार्थना के लिए ही मैं इस समुद्र- तट पर योग-समाधि लेना चाहता हूँ । योग- समाधि पूर्व के इस पल में मैं तुमसे एक क्षमा-याचना करना चाहता हूँ भाई । ”
” यह आप क्या कह रहे हैं, दाऊ? आप तो मेरे ज्येष्‍ठ भ्राता.. ”
बलराम ने कहा, ” मद्य-निषेध तो एक निमित्त था, परंतु वृष्णि वंशियों के लिए उनका सनातन गौरव अखंड रखने के लिए यह निमित्त अनिवार्य था । फिर भी हम उसे सँभाल न सके । अब इस असफलता को स्वीकार करने में कोई लज्जा या संकोच नहीं होना चाहिए । यादवों को यह गौरव प्राप्‍त होता रहे, इसके लिए तुमने बहुत कुछ किया; परंतु यादव उस गौरव से वंचित रहे, उस अपयश को मुझे स्वीकार करना चाहिए । समग्र यादव वंश को तो ठीक परंतु कृष्ण.. ” बलराम का कंठ रुँध गया, ” भाई, मैंने तुमसे भी छल… ”
” ऐसा मत कहिए बड़े भैया!” बलराम के एकदम निकट बैठते हुए कृष्ण ने उनके हाथ पकड़ लिये, ” हम तो निमित्त मात्र हैं । कर्मों का निर्धारण तो भवितव्य कर चुका होता है । ”
-इसी उपन्यास से

Operation Yoddha by Sushant Saini

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अर्जुन एक होनहार लड़का है, जो सेना में जाने के सपने देखता है। लेकिन आई.आई.टी. प्रवेश परीक्षा में अचानक ही मिली सफलता उसे दुविधा में डाल देती है। हमेशा साथ निभानेवाला उसका परिवार उसे इस उलझन से निकालता है और उसके सपनों को पूरा करने में मदद करता है।
नेशनल डिफेंस एकेडमी में उसकी दोस्ती तीन अन्य प्रशिक्षुओं से होती है और ये दोस्ती जीवन भर के लिए हो जाती है। आखिरकार, उसे भारतीय सेना की सबसे गुप्त और घातक टीम ‘टीम-ए’ का हिस्सा बनने का मौका दिया जाता है।
अर्जुन अपना जीवन देश के प्रति समर्पित कर देता है और कई प्राणघातक अभियानों को पूरा करता है। लेकिन एक खतरनाक आतंकवादी हमला अर्जुन को उन सारी बातों पर सवाल करने के लिए मजबूर कर देता है, जिन्हें उसने सीखा और जिन्हें वह पसंद करता था। अपने देशवासियों के कदमों से उसे घोर निराशा होती है और वह अपना वतन छोड़ने का फैसला करता है।
लेकिन इससे पहले कि वह अपना सामान बाँधता और देश को अलविदा कहता, 200 से अधिक यात्रियों वाले एक विमान को एक अज्ञात गिरोह हाईजैक कर लेता है। सिर्फ वही उन्हें बचा सकता है। पर क्या कड़वाहट से भर चुका अर्जुन अपनी और अपनी टीम के लोगों की जान एक बार फिर जोखिम में डालेगा?
भारतीय सेना के जाँबाज वीरों के पराक्रम, समर्पण और राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत प्रेरणाप्रद पठनीय पुस्तक।